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Kanpur News: बैरक में बेहोश हुआ अखिलेश दुबे, उर्सला में भर्ती

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कानपुर। रंगदारी के मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे की शुक्रवार रात जेल में हालत बिगड़ गई। जेल के डॉक्टरों को बुलाकर उसकी जांच कराई गई। हालत ठीक न देख उसे बेहोशी की ही हालत में उर्सला अस्पताल भेजा गया। यहां उसे प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 203 में भर्ती किया गया। जेल अधीक्षक राजेश पांडे ने बताया कि अखिलेश के मसूड़ों में तकलीफ थी। छोटा सा ऑपरेशन होना है। तीन-चार दिन बाद उसे जेल में वापस लाया जा सकता है।
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बता दें कि रंगदारी के अलाव कई अन्य गंभीर आरोपों के चलते अखिलेश करीब सवा साल से जेल में बंद है। जेल अधीक्षक ने बताया कि शुक्रवार रात अचानक अखिलेश अपनी बैरक में बेहोश हो गया। जेल के डॉक्टर समीर को बुलाया गया। जांच में सामने आया कि अखिलेश के मसूड़ों से पस आ रहा था। वह पिछले एक सप्ताह से ठीक से कुछ खा-पी भी नहीं पा रहा था। इस कारण भी शरीर में कमजोरी थी। स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) में परेशानी तथा ब्लड प्रेशर और शुगर का स्तर बढ़ने के कारण उर्सला में भर्ती कराया गया है। जेल अधीक्षक के मुताबिक जल्द ही मसूड़ों का ऑपरेशन कराकर अखिलेश को वापस जेल लाया जाएगा।

कानपुर। अखिलेश को शुक्रवार रात करीब आठ बजे आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इसके बाद स्थिति में सुधार और डॉक्टरों के परामर्श पर शनिवार सुबह प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया। फिलहाल, डॉ. एसपी राजपूत, डॉ. आरके किशोर की टीम मॉनीटरिंग कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि मसूड़ों का एक्स-रे कराया जाएगा। उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे का उपचार किया जाएगा। जब बीपी, शुगर कंट्रोल नहीं होगा तब तक उसके दांत का इलाज शुरू नहीं हो सकता। संवाद
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डॉक्टरों के अनुसार अखिलेश को बहुत गंभीर या विशेष बीमारी नहीं है बल्कि उसे अधिक उम्र में होने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर रही हैं। डॉक्टरों ने बताया कि बढ़ती उम्र के कारण ब्लड प्रेशर और शुगर अनियंत्रित हो गया है। रीढ़ की हड्डी में भी परेशानी महसूस हो रही है।चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि अखिलेश जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज किया जा रहा है।

अस्पताल में शनिवार को पूरे दिन चर्चा रही कि अखिलेश दुबे को अस्पताल में आराम करने के लिए लाया गया है। सूत्रों के अनुसार पिछली बार छह अप्रैल को उसे भर्ती कराया गया। वो साढ़े तीन महीने भर्ती रहा था लेकिन इतने दिन रुकने के नाम पर उसने किसी को भी उपहार नहीं दिया। मांगने पर रौब भी दिखाया तो जल्दी ही सभी ने उसे स्वस्थ बताते हुए जेल भेज दिया। वहीं, इस बार फिर से उसे अस्पताल के एक डॉक्टर लेकर आए हैं और अस्पताल के दूसरे डॉक्टरों पर उसका अच्छे से ख्याल रखने का दबाव बना रहे हैं।
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