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पचास किसानों ने साढ़े तीन क्विंटल मशरूम का किया उत्पादन

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मशरूम के साथ खड़ी महिलाएं व मौजूद कृषि वैज्ञानिक। - फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। जिले के अलग-अलग गांवों में 50 किसानों ने मशरूम की खेती की थी। 23 दिन बाद साढ़े तीन क्विंटल मशरूम की पैदावार हुई। अब उसे कुपोषित बच्चों को बांटा जा रहा है।
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कुपोषण और बेरोजगारी रोकने के लिए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने एक वृहद अभियान चलाया है। कुलपति ने जिले में मैथा तहसील क्षेत्र के अनूपपुर गांव के बच्चों मेंकुपोषण दूर करने के लिए भारत के पहले बायोफोर्टीफाइड गांव के रूप चयनित किया था। अभियान के तहत फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने अनूपपुर, रुदापुर, औरंगाबाद, काशीपुर, सहतावन पुरवा गांव में पचास किसानों को मशरूम तैयार करने के लिए नवंबर माह में प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद किसानों ने मशरूम की बुआई की। जिसकी बंपर पैदावार हुई है। अब लोगों को खाने योग्य मशरूम मिलने लगी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताया कि गांवों में हुए मशरूम को गांव के कुपोषित बच्चों को खाने के लिए दिया जा रहा है। बताया कि मशरूम एक महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ एवं पोषण का एक स्रोत है। शरीर के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व मशरूम में पर्याप्त मात्रा होता है।
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