कानपुर में बचपन के दोस्त 25 साल बाद एक साथ आए और स्कूल का माहौल मिला तो पुरानी यादों में खो गए। एक-दूसरे से मिलने की खुशी में कोई अमेरिका तो कोई दिल्ली से चला आया। मौका था सर पदमपत सिंहानिया स्कूल में 1995 बैच के छात्रों के लिए ‘बैक टूगेदर अगेन’ री-यूनियन का। समारोह में सभी ने बच्चों की तरह मौज-मस्ती की। स्कूल का वो दौर याद करते हुए किसी ने दफ्तियों से क्रिकेट खेला तो किसी ने ग्रुप बनाकर पुराने पलों को याद किया। दोस्तों के पुराने नाम लेकर एक-दूसरे को भी सब छेड़ते नजर आए।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल की छात्राओं ने सांस्कृतिक नृत्य से किया। इसके बाद फैशन शो में सभी ने रैंप वाक किया। पूर्व छात्र-छात्राओं का कहना था कि इतने साल बाद स्कूल में आकर पुराने टीचर्स व दोस्तों से मिलकर ऐसा लगा कि फिर वही समय लौट आया। पूर्व छात्र राहुल मिश्रा और अमित जैन ने बताया कि वे लोग क्लास में ही दफ्तियों को बैट बनाकर मैच खेला करते थे। उन पलों को याद करते हुए उन्होंने क्रिकेट खेला। साथ में लेमन, स्पून और थ्री लेग्ड रेस का लुत्फ उठाया। पूर्व छात्रों ने टीचर्स का सम्मान भी किया। इस मौके पर स्कूल की प्रधानाचार्य भावना गुप्ता, मंजू गुप्ता, देवनिता बख्शी, वंदना त्रिवेदी आदि शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का आयोजन प्रमद गुप्ता, अनुपम डालमिया, हरप्रीत भाटिया, अनुराग नेवटिया, रितिक भाटिया, अमित नागरथ और अमित जैन ने किया।
- री-यूनियन के बारे में पता चला तो तुरंत अमेरिका से आने का टिकट करा लिया। मैं क्लास की वो स्टूडेंट थी, जो सबके लिए एग्जाम से पहले नोट़स बनाती थीं। - पल्लवी अग्रवाल, शिक्षिका, अमेरिका
- मैं हमेशा स्कूल लेट पहुंचता थे। टीचर हमेशा क्लास का गेट बंद कर देती थीं और मुझे अंदर नहीं आने को मिलता था। हमेशा सेकंड पीरियड से ही क्लास में मेरी एंट्री होती थी। - अतुल मेहरोत्रा, व्यवसायी
- स्कूल में पढ़ाई के दौरान मेरा नाम हमेशा सबसे बदमाश बच्चों की लिस्ट में शामिल रहता था। बाकी विषयों में तो ठीक था, लेकिन मैथ्स से हमेशा डरता था। इससे उसमें फेल भी हुआ। - अमन घई, व्यवसायी