‘उत्तरप्रदेश में शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त है। यहां न तो स्कूलों में लैब है और न ही पूरे शिक्षक, जो कुछ शिक्षक हैं भी तो उनसे इतने सारे कार्य कराए जा रहे है कि वो अपने शिक्षण कार्य से पूरे साल विरत रहते हैं।
इसके अलावा शिक्षकों की गुणवत्ता भी अब योग्यता पर नहीं आंकी जा रही है। शिक्षक भर्ती के लिए चयन बोर्ड पैसे वसूली कर रहा है। यही कारण है कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ऊंचाई पर जाने की बजाय गर्त पर जा रही है।’
यह बातें मर्चेंट चैंबर हाल में हुए उत्तरप्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडलीय सम्मेलन में उपाध्यक्ष रमाकांत द्विवेदी ने कहीं। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आए चेयरमैन उत्तर प्रदेश डेस्को, आत्म प्रकाश शुक्ल ने शिक्षक संघ की स्मारिका का विमोचन किया।
मौजूद शिक्षकों में से अब्दुल हसीब, मोहम्मद कामरान, रमाकांत शुक्ला, पुरुषोत्तम दीक्षित, डॉ मुन्नी द्विवेदी, प्रभा कक्कड़, डॉ. शशि सचान, रश्मि अस्थाना, मूलचंद्र यादव, विमलचंद्र गंगवार, राममुरारी शुक्ल सहित 63 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर प्रांतीय महामंत्री हरिश्चंद्र दीक्षित ने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए गठित आयोगों के सुझावों को दरकिनार किया जाता रहा है, जिस कारण आज शिक्षा की दिशा और दशा दोनों चिंतनीय है। शिक्षा दिनों दिन अपना स्वरूप खोती जा रही है।
शिक्षा प्रणाली को बदलने की जरूरत है। इस मौके पर कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। जिसमें डॉ राधेश्याम मिश्र ने ‘देख के तुमको बदलने लगा मेरा मन, मोम जैसा पिघलने लगा मेरा मन..’ सुनाकर तालियां बटोरी।
मुख्य अतिथि आत्म प्रकाश शुक्ल ने ‘खाक का पतंग मिला, राख का बिछौना, जिंदगी मिली कि जैसे कांच का खिलौना...’ सुनाकर वाहवाही लूटी।