कानपुर। 14 मई को हनुमंत विहार में युवक की आत्महत्या करने के मामले में पुलिस ने अधिवक्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। रिपोर्ट में अधिवक्ता के साथियों को भी आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाया गया है।
आरोप है कि सभी ने युवक की जमीन पर कब्जा कर लिया। इसी के चलते उसने आत्महत्या कर ली। एक महीने बाद रिपोर्ट दर्ज हुई है। सुसाइड करने वाले सौरभ द्विवेदी की मां शकुंतला ने बताया कि बेटे ने वर्ष 2020 में अर्रा निवासी छत्रपाल सिंह से जमीन ली थी।
इसमें राजस्व संबंधित व बंटवारे से जुड़ी कुछ कानूनी प्रक्रिया शेष थी। छत्रपाल ने सौरभ के नाम पॉवर ऑफ अटॉर्नी कर दी थी। वर्ष 2024 में छत्रपाल की मृत्यु होने पर उसके बेटे रवि सिंह ने जमीन उसके ही नाम दर्ज कराने को कहा।
आश्वासन दिया कि बाद में वह जमीन दोबारा बेटे के नाम कर देगा। इस पर बेटे ने जमीन उसके नाम चढ़वा दी। जमीन बंटवारे का विवाद न्यायालय में विचाराधीन होने पर बेटे ने पैसा वापस मांगा। इस पर राघवेंद्र प्रताप सिंह, धीरेंद्र सिंह, हाकिम सिंह, कंचन सिंह, सुरेंद्र सिंह ने उसे फोन कर धमकाया।
आरोपियों ने न तो जमीन बेटे के नाम की, न ही रकम लौटाई। बेटे ने आपत्ति की तो आरोपियों ने बेटे को जमकर पीटा था। अब उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद हनुमंत विहार पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी उदय प्रताप सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर आरोपों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
झूठे मामले में भी फंसा दिया बेटे को
शकुंतला ने बताया कि बेटे ने बर्रा और हनुमंत विहार पुलिस से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उल्टा आरोपियों ने बेटे को ही 30 लाख के गबन के झूठे मामले में फंसा दिया।
उसे कई बार फोन कर धमकाया गया। इनकी रिकॉर्डिंग उसके मोबाइल में मौजूद थी। हालांकि पुलिस ने बहू को जेल भेजने की धमकी देकर मोबाइल के पासवर्ड पूछे और रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी।
ये बने आरोपी
रवि सिंह भदौरिया, अर्चना सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, धीरेंद्र सिंह, हाकिम सिंह, कंचन सिंह, सुरेंद्र सिंह और अन्य