जांच में पता चला है कि दवाई को खासतौर पर नशे के लिए ही बनाया गया था।
कानपुर। डायबिटीज, एंटीबायोटिक समेत कई तरह की कॉम्बिनेशन वाली दवाएं मार्केट से गायब होने लगी हैं। डॉक्टरों को अब एक मर्ज के उपचार के लिए अलग-अलग दवाएं लिखनी पड़ रही हैं। इसका बोझ मरीजों की जेब पर पड़ा है। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का भी मानना है कि गंभीर चोटों के अलावा डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसे तमाम रोगों का इलाज कॉम्बिनेशन दवाओं पर रोक के बाद महंगा हो गया है।
दस मार्च को केंद्र सरकार ने कॉम्बिनेशन की 344 दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसमें डायबिटीज की सबसे ज्यादा 23 तरह की दवाएं थीं। हार्ट, ब्लड प्रेशर, खांसी, एंटीबायोटिक आदि की भी दवाएं प्रतिबंध में शामिल की गई थीं। आदेश के खिलाफ दवा कंपनियों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की। हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद भी ज्यादातर कंपनियों ने कॉम्बिनेशन वाली दवाओं को बनाना छोड़ दिया है। इसका असर अब मार्केट में दिखने लगा है।
पायोग्लिटाजोन कॉम्बिनेशन वाली नहीं मिल रही
डायबिटीज की दवाओं में सबसे महत्वपूर्ण मालीक्यूल पायोग्लिटाजोन है। इस दवा के साथ कॉम्बिनेशन की दवाएं नहीं मिल रही हैं। अब डॉक्टरों को मजबूरी में पायोग्लिटाजोन को अलग से लिखना पड़ रहा है। इससे मरीजों को दवाएं महंगी पड़ रही हैं।
एंटीबायोटिक तो चलेगी
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर चोटों में तो तगड़ी एंटीबायोटिक ही चलाई जाती है। उदाहरण के रूप में हड्डियों के घाव को भरने के लिए लिंजोलिड व सेफेक्जाइम या लिंजोलिड व सेफरोक्जाइम कॉम्बिनेशन की दवाएं बहुत अच्छा काम करती हैं। दोनों कॉम्बिनेशन की दवाएं बंद होने से डॉक्टरों को दोनों दवाएं अलग-अलग लिखनी पड़ रही हैं। इससे मरीजों को हर खुराक 20 रुपये से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
गैस की दवा पर गलत सूचना
कानपुर (ब्यूरो)। गैस की कैप्सूल और एक सीरप के लेबल पर गलत सूचना (मिस ब्रांडेड) की पुष्टि के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों को मिस ब्रांडेड दवाओं का उत्पादन एक महीने बंद करना होगा। ड्रग इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने बताया कि एक स्टोर से ली गई दवा ओमेप्राजोल, राम नारायन बाजार से ली गई दवा ओमेडीएम और स्वरूप नगर से ली गई टीजर सीरप जांच में मिस ब्रांडेड साबित हुई है।