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ट्रांसगंगा के विकास की आखिरी बाधा दूर

Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
Kanpur
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कानपुर। उन्नाव-कानपुर के बीच प्रस्तावित यूपीएसआईडीसी की ट्रांसगंगा परियोजना की आखिरी बाधा भी दूर हो गई है। गत शुक्रवार को शंकरपुर सराय गांव के बचे हुए 274 किसानों को अधिग्रहीत जमीन का 18 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दे दिया गया है। यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक मो. इफ्तिखारुद्दीन के मुताबिक अब जमीन को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू होगी। इसके लिए अधिकारी नामित कर दिए गए हैं। जमीन पर कब्जा मिलने के बाद विकास का काम शुरू कर औद्योगिक, आवासीय प्लाटों का आवंटन किया जाएगा।
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यूपीएसआईडीसी की ट्रांसगंगा परियोजना को 2007 में विशेष आर्थिक परिक्षेत्र (एसईजेड) घोषित किया गया था लेकिन भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के विवाद में मामला लटक गया। प्रबंध निदेशक ने बताया कि ट्रांसगंगा का क्षेत्रफल 1100 एकड़ में फैला हुआ है। यह जमीन तीन गांव के लगभग 1645 किसानों से ली गई है, जिन्हें प्रति बीघा पांच लाख रुपये के हिसाब से 1.06 अरब रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। इसके बावजूद किसानों ने जमीन से कब्जा नहीं छोड़ा है। वह अब भी खेती कर रहे हैं। जमीन अधिग्रहण का काम पिछले 10 साल से चल रहा है। करीब 284 किसान ऐसे थे, जिन्हें 20 करोड़ रुपये का मुआवजा नहीं दिया जा सका था। शुक्रवार को बातचीत करने के बाद 274 किसानों को मुआवजा दे दिया गया है। 10 अन्य किसानों को भी जल्द मुआवजा दे दिया दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्रांसगंगा में औद्योगिक, आवासीय परिक्षेत्र के लिए सड़क, पानी, बिजली, सीवर, दूरसंचार और सुरक्षा के खास इंतजाम किए जाएंगे। यूपीएसआईडीसी की मंशा है कि प्रदेश में औद्योगिक इकाइयां स्थापित कराकर रोजगार विकसित किए जाएं।
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