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बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे जगेंद्र

Thu, 31 Jul 2014 05:30 AM IST
Kanpur
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कानपुर। दयानंद शिक्षण संस्थान के महामंत्री और एमएलसी जगेंद्र स्वरूप बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वह कानूनविद थे। उन्होंने शिक्षा के विकास और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के 15 साल तक अध्यक्ष रहे। ग्रीनपार्क में फ्लड लाइटें भी लगवाईं। ग्रीनपार्क में तमाम नेशनल, इंटरनेशनल क्रिकेट मैच कराने की उपलब्धि हासिल की।
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दयानंद शिक्षण संस्थान के महामंत्री के तौर पर जगेंद्र स्वरूप ने यूपी और उत्तराखंड में 20 से ज्यादा शैक्षिक संस्थाएं स्थापित कराईं। इन संस्थाओं में फिलहाल 1.25 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। 5000 टीचर्स हैं। कर्मचारियों के साथ ही प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से तमाम लोगों को रोजगार मिले हैं। उनके निधन से इन सभी को गहरा आघात लगा है। 34 साल तक लगातार एमएलसी रहने के बाद भी सहज स्वभाव के जगेंद्र स्वरूप हमेशा विवादों से दूर रहे। उनका बच्चों से विशेष लगाव था।

स्वरूप परिवार के पास 98 साल से है विधान परिषद सीट
जगेंद्र स्वरूप को एमएलसी का पद विरासत में मिला। उन्होंने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई। राय बहादुर आनंद स्वरूप जाने-माने में अधिवक्ता थे और 1916 में विधान परिषद के सदस्य हुए थे। भारत की स्वतंत्रता के पहले वह विधान परिषद के उपसभापति भी रहे। उनके निधन के बाद राय बहादुर डॉ. बृजेंद्र स्वरूप 1934 में विधान परिषद के सदस्य बने और 25 साल तक इस पद पर बने रहे। 1956 में डॉ. वीरेंद्र स्वरूप विधान परिषद के सदस्य बन गए। उनके निधन के बाद 1980 में उनके पुत्र जगेंद्र स्वरूप विधान परिषद सदस्य बने थे।
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छठवीं बार जीते थे एमएलसी का चुनाव
1980 में जगेंद्र स्वरूप जब कानपुर-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी बने तब इसमें सात जिले आते थे। तब उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से चुनाव हराया था। बाद में परिसीमन हुआ और कानपुर-झांसी की जगह तीन जिलों (कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव) को मिलाकर कानपुर-उन्नाव स्नातक निर्वाचन क्षेत्र बना। इस क्षेत्र से जगेंद्र स्वरूप ने 1986, 1992, 1998, 2004 और 2010 में छठवीं बार चुनाव जीता। विधान परिषद में अभी उनका कार्यकाल दो साल बाकी था। वह किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं थे। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश विधान परिषद में निर्दलीय समूह के नेता थे।

पढ़ाई
दसवीं और 12वीं की पढ़ाई शहर के मैथाडिस्ट से करने के बाद जगेंद्र स्वरूप ने नई दिल्ली के चर्चित सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बीएससी किया था। क्राइस्ट चर्च डिग्री कॉलेज से एमए राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की और सत्र 1969-70 के यूनिवर्सिटी टॉपर बने। उन्हें चांसलर गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया था। 1972 में उन्होंने वीएसएसडी पीजी कॉलेज से एलएलबी किया और यूनिवर्सिटी टॉपर बनकर दूसरी बार चांसलर गोल्ड मेडल प्राप्त किया था।


उपलब्धि
कानून की पढ़ाई के बाद जगेंद्र स्वरूप ने वकालत शुरू की थी। अच्छी वकालत की बदौलत ही वह आईआईटी कानपुर, यूपीएफसी, बीआईसी, जेके ग्रुप, कानपुर यूनिवर्सिटी और रामगंगा क्षेत्र विकास प्राधिकारी सहित तमाम संगठनों के कानूनी सलाहकार थे। बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी, आगरा यूनिवर्सिटी और कानपुर यूनिवर्सिटी की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के भी सदस्य रहे। एचबीटीआई के बोर्ड आफ गवर्नर (बीओजी) के सदस्य भी थे।

अवार्ड
शिक्षा के विकास, उसके प्रचार-प्रसार और समाज कार्य के लिए जगेंद्र स्वरूप को वर्ष 1987 में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने ‘सिटीजंस अवार्ड’ देकर सम्मानित किया। बेहतर सामाजिक कार्य के लिए ही अमेरिकन बायोलॉजिकल इंस्टीट्यूट अमेरिका ने 1995 में उन्हें ‘मैन आफ द ईयर अवार्ड’ दिया था।


आईपीएस की नौकरी छोड़ी
जगेंद्र स्वरूप का सेलेक्शन सिविल सर्विसेज में भी हुआ था। आईपीएस कैडर मिला था लेकिन वह नौकरी पर नहीं गए। उनके छोटे भाई डॉ. नागेंद्र स्वरूप ने बताया कि वह (बडे़ भाई जगेंद्र) शिक्षा के विकास और सामाजिक कार्यों में लगे रहे। जगेंद्र की पत्नी संध्या स्वरूप का भी आईएएस में सेलेक्शन हुआ, लेकिन वह नौकरी पर नहीं गईं।
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