कानपुर। अस्थमा की बीमारी से पीड़ित 81 वर्षीय साहित्यकार एवं कवि ज्योति शंकर शुक्ल उर्फ ज्योति गुरु का बुधवार शाम 7 बजे उनके शिवालय स्थित आवास पर निधन हो गया। अंतिम यात्रा शिवाला स्थित उनके निवास से उठेगी। अंतिम संस्कार भगवतदास घाट पर सुबह 10:30 बजे किया जाएगा।
कवि गोपालदास नीरज के मित्र रहे ज्योति गुरु अपने पीछे पत्नी माया शुक्ला, बेटा वरदान, बहू प्रज्ञा, बड़ी बेटी रेनू और छोटी बेटी डॉ. शिखा शुक्ला सहित पोती को छोड़ गए हैं। ज्योति गुरु का जन्म पुरावली गांव में दीपावली के दिन 1933 में हुआ था। फक्कड़ और मस्त स्वभाव के चलते ज्योति गुरु ने साहित्य की दुनिया में न सिर्फ नाम कमाया बल्कि लोगों के बहुत प्रिय भी हुए। वे कानपुर विश्वविद्यालय से बतौर क्लर्क सेवानिवृत्त हुए थे। बेटे वरदान ने बताया कि कवि नीरज कई दिनों तक ज्योति गुरु के साथ उनके घर में भी रह चुके हैं। दोनों में खूब पटती थी। इनकी रचना ‘ज्योति हमारे साथ कोई बात है जरूर, यूं ही न हम पे तीर चले थे बहुत’ और ‘मैंने शराब ले के हवा में उछाल दी, फिर जिदंगी की यूं न किसी ने मिशाल दी’ काफी चर्चित है। परिजनों के मुताबिक ज्योति गुरु जेके ग्रुप कमला टावर, सदरलैंड हाउस और बीआईसी में भी काम कर चुके हैं। यहां पर भी इनके कई चाहने वाले लोग हैं।