कानपुर। चुनाव आचार संहिता हटते ही एसएसपी अजय कुमार मिश्र ने एसआई भीम सेन पौनिया को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। उन्हें मूलगंज से हटाकर बाबूपुरवा थाने का इंचार्ज बना दिया। इसके अगले ही दिन आईजी की गाज गिराने वाली चिठ्ठी आ गई। आईजी ने एक पुराने शिकायती पत्र की जांच में पौनिया और मामले के विवेचक को दोषी मानते हुए दोनों पर विभागीय कार्यवाही के लिए एसएसपी को निर्देशित किया है।
चौबेपुर की एक महिला ने सात फरवरी को आईजी सुनील कुमार गुप्ता को एक शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें बताया कि दो जुलाई को उसका बिहारीगंज के शीतल गोस्वामी से झगड़ा हुआ। शीतल, राजेश, दिनेश एवं नीलू ने हमला बोल दिया। गाली-गलौज करते हुए घर में घुस आए। बदनीयत से उसे दबोचा और रेप की कोशिश की। वह थाने गई तो तत्कालीन थानाध्यक्ष भीम सेन पौनिया ने कोई कार्रवाई नहीं की। बकौल महिला, वह कोर्ट गई। वहां से आदेश होने पर चौबेपुर थाने में मारपीट, घर में जबरन घुसने, जानमाल की धमकी देने, शारीरिक छेड़छाड़, रेप की कोशिश की रिपोर्ट दर्ज हुई। इसके बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही। आईजी ने इसकी जांच एसपी ग्रामीण डॉ. अनिल मिश्र को सौंपी। जांच में पाया गया कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश 29 अगस्त 13 को हुआ। थाने पर 30 अगस्त को आदेश पहुंचा। फिर भी 15 दिन बाद 14 सितंबर को रिपोर्ट लिखी गई। विवेचना एसआई देवेंद्र कुमार ने की और धारा को मामूली मारपीट में तब्दील कर आरोप पत्र भेज दिया। विवेचना में पीड़िता का 164 (दंड प्रक्रिया संहिता) में बयान भी दर्ज नहीं कराया गया।
आईजी ने बताया कि एसपी की रिपोर्ट में बताया गया कि अभियोग को देरी से दर्ज किया गया। विवेचना भी ठीक से नहीं हुई। ऐसे में भीम सेन पौनिया और विवेचक एसआई देवेंद्र कुमार नियमानुसार काम नहीं करने के दोषी हैं। इधर, एसएसपी अजय कुमार मिश्र का कहना है कि निर्देश पत्र मिलने पर अपेक्षा के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।