कानपुर। बाल रोग चिकित्सालय में मंगलवार को औषधि निरीक्षकों ने एंटीबायोटिक इंजेक्शन सिफ्जिम (सिफ्ट्राक्सॉन) के साथ ही ग्लूकोज और सिरिंज के सैंपल भी लिए। इन्हें जांच के लिए राजकीय जनविश्लेषक प्रयोगशाला भेजा गया है। उधर, हैलट और इससे संबद्ध सभी अस्पतालों में इनका इस्तेमाल रोककर पूरी लाट सील कर दी गई है। इंजेक्शन निर्माता कंपनी जी लेबोरेट्री को पत्र लिखकर उनके स्तर से भी इस इंजेक्शन की जांच कराने को कहा गया है। 20 हजार से ज्यादा इंजेक्शनों की पूरी लाट कंपनी को लौटाई जाएगी।
हैलट से संबद्ध बाल रोग चिकित्सालय में 23 सितंबर को इमरजेंसी और वार्डों में भर्ती जिन बच्चों को जी लेबोरेट्री कंपनी के सिफ्जिम इंजेक्शन लगाए गए। 10-15 मिनट बाद ही उनमें से 25 बच्चों की हालत बिगड़ने लगी थी। इसका पता चलते ही मंगलवार को औषधि विभाग के मंडल प्रभारी एलके सिंह के निर्देश पर औषधि निरीक्षक एके जैन और मनोज सिंह दोपहर में बाल रोग चिकित्सालय पहुंचे। दोनों ड्रग इंस्पेक्टरों ने मरीजों का हाल चाल लेने और अफसरों से बातचीत के बाद इस इंजेक्शन के 200 ब्वायल (शीशियों), 200 सिरिंज और ग्लूकोज (नार्मल सेलाइन) की 20 बोतलों के सैंपल लिए। ड्रग इंस्पेक्टर एके जैन ने बताया कि तीनों दवाओं के सैंपल राजकीय जनविश्लेषक प्रयोगशाला भेजे गए है। कोशिश है कि जांच रिपोर्ट जल्द आ जाए। हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्र और बाल रोग चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. शशांक श्रीवास्तव ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने तक इन इंजेक्शनों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। कहा कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं।
चालान पर हस्ताक्षर से बचने को खींचतान
सैंपल लेने के बाद चालान पर हस्ताक्षर को लेकर बाल रोग चिकित्सालय के सीएमए और फार्मेसिस्ट में आधा घंटे तक खींचतान होती रही। दोनों अपने रिटायरमेंट और जांच के दौरान कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से बचने का हवाला देकर हस्ताक्षर करने से कतरा रहे थे। बाद में सीएमएस ने हस्ताक्षर किए।
हर साल खरीदी जाती हैं 3.70 करोड़ की दवाएं
हैलट और संबद्ध अस्पतालों में हर साल 3.70 करोड़ की दवाएं खरीदी जाती हैं। चालू वित्तीय वर्ष में भी 1.85 करोड़ रुपये से ग्लूकोज समेत विभिन्न तरह की दवाएं खरीदी जा चुकी हैं। 50 लाख से ज्यादा की दवाओं के आर्डर संबंधित दवा कंपनियों को दिए गए हैं।
हैलट, संबद्ध अस्पतालों में दवाओं का बजट
अस्पताल बजट (लाख रुपये में)
हैलट 270
बाल रोग चिकित्सालय 30
जच्चा-बच्चा अस्पताल 40
मुरारीलाल चेस्ट अस्पताल 20
संक्रामक रोग चिकित्सालय 10
योग 370 लाख रुपये
टेंडरों से खरीदी जाती हैं दवाएं
हैलट और संबद्ध अस्पतालों में ढाई सौ दवाओं की आपूर्ति के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज हर साल टेंडर आमंत्रित करता है। चालू वित्तीय वर्ष में दवाओं की आपूर्तिकर्ता भारतीय और विदेशी कंपनियों के साथ यह शर्त लगा दी गई थी कि जो भी कंपनी टेंडर डालेगी, उसका सालाना टर्नओवर 100 करोड़ या इससे ज्यादा होना चाहिए। टेंडर पड़ने के बाद पर्चेजिंग कमेटी सबसे पहले टेक्निकल बिड खोलेगी। इसके बाद फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। इसके बाद प्रत्येक दवा के लिए न्यूनतम राशि में टेंडर डालने वाली कंपनी को आपूर्ति के लिए रेट कांटेक्ट (आरसी) जारी की जाएगी। हिमाचल प्रदेश की जी लेबोरेट्री कंपनी को चालू वित्तीय वर्ष में पहली बार पर्चेजिंग में शामिल किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ सालाना टर्नओवर तक की कंपनियों से दवाएं खरीदी गई थीं।