कानपुर। विश्व बंधुत्व की भावना में कमी होने के कारण ही विश्व के कई देश आंतरिक हिंसा से जूझ रहे हैं। इसका फायदा पूरे विश्व पर दादागिरी करने वाला अमेरिका उठा रहा है। सीरिया, लीबिया, इराक, अफगानिस्तान में अमेरिका ने आंतरिक हिंसा के जरिए इन देशों और उनके संसाधनों पर कब्जा तक कर लिया है। यदि अमेरिका के मंसूबों को जल्द नहीं रोका गया तो मध्य पूर्व देशों की शांति के लिए वह बड़ा खतरा बन सकता है। पूरे विश्व में आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर भारत ही गुट निरपेक्ष राष्ट्रों को एकजुट करके पूरे विश्व में शांति स्थापित करवा सकता है। ये बातें रविवार को अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन की ओर से मर्चेंट चैंबर में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कहीं।
‘अमेरिका मध्य पूर्व देशों की शांति के लिए खतरा विषय’ पर आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता दिल्ली साइंस फोरम के प्रमुख प्रवीर पुरकायस्थ ने कहा कि अमेरिका की नजर मध्य पूर्व राष्ट्रों की तेल संपदा है। इसी रणनीति के तहत इराक, लीबिया, सीरिया, मिस्त्र, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ट्यूनिशया में अमेरिका आंतरिक हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। संगठन के प्रदेश संयोजक डा. आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि पूरे विश्व में शांति बनाए रखने में भारत को महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभानी होगी। संचालन अशोक तिवारी ने किया। पूर्व सांसद सुभाषिनी अली, विमल त्रिवेदी, अरविंद राज स्वरूप ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर राकेश मिश्रा, कुलदीप सक्सेना, आदर्श बाजपेई, सईद नकवी, शरद अग्रवाल, प्रताप साहनी, सीमा कटियार, उर्मिला अवस्थी, विनोद बिहारी, बाबूलाल आदि मौजूद रहे।