कानपुर। पहले से संकट झेल रही कानपुर शहर की लेदर इंडस्ट्री की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आम बजट में देश में आने वाले विदेशी जूतों को सस्ता कर दिया गया है। इसका सीधा असर शहर की लेदर इंडस्ट्री पर पड़ेगा। बजट में विदेश से मंगाए जाने वाले जूतों पर कस्टम ड्यूटी 7.5 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है।
स्माल टेनर्स एसोसिएशन के नैय्यर जमाल का कहना है कि जिस तरह भारत की खिलौना और क्राकरी इंडस्ट्री ने चीन के माल के आगे दम तोड़ दिया, इसी तरह फुटवियर इंडस्ट्री पर भी अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा। बाजार में चीन के बने जूतों की भरमार हो जाएगी और घरेलू उत्पाद की मांग घटेगी। सुपरहाउस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुख्तारुल अमीन का कहना है कि बजट में लेदर इंडस्ट्री के लिए कोई राहत नहीं दी गई है, उल्टे इसकी मुश्किलें बढ़ा दी गई हैं। विदेशी जूतों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी घटाने से घरेलू मैन्युफैक्चरर्स पर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार में विदेशी माल आने से कारोबारी मुश्किलें बढ़नी तय हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की लेदर विंग के चेयरमैन नवनीत खुराना का कहना है कि इससे हमारे उत्पाद महंगे पड़ेंगे, जबकि विदेशी माल सस्ता पड़ेगा। ऐसे में कारोबार में कमजोरी आएगी। हालांकि, लेदर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली मशीनों पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी को 7.5 से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है, जो कि थोड़ी राहत देने वाला है। खुराना ने बताया कि इससे कानपुर में बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता थोड़ी बेहतर होगी, क्योंकि हम बेहतर मशीनों का इस्तेमाल कर पाएंगे। दमदार प्रोडक्ट से एक्सपोर्ट मार्केट में भी हमारी दावेदारी मजबूत होगी। नार्दर्न टेनरी के ओनर मोईन लारी का कहना है कि इस प्रावधान से भारतीय बाजार में विदेशी माल का दखल बढ़ेगा। घरेलू लेदर उद्योग के कारोबार के लिहाज से यह अच्छा कदम नहीं है। बजट में लेदर इंडस्ट्री को सरकार ने कोई सहूलियत नहीं दी है, जबकि विदेशी मुद्रा लाने में इस सेक्टर का अहम रोल है।
प्वाइंटर
- कानपुर में करीब 430 लेदर टेनरियां हैं
- 1,500 के करीब सैंडल, जूता और दूसरे फुटवियर प्रोडक्ट्स बनाने वाली छोटी-बड़ी फर्में
- लेदर इंडस्ट्री करीब 6,000 करोड़ रुपये के उत्पाद का निर्यात करती हैं
- डेढ़ लाख लोगों को लेदर इंडस्ट्री में रोजगार मिला हुआ है
- फुटवियर प्रोडक्ट्स का निर्यात 500 करोड़ रुपये है
-1,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर पहले ही कानपुर की लेदर इंडस्ट्री के हाथ से निकल चुके हैं