कानपुर। ‘चार साल पहले मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर गोलियां और बम बरसा कर कसाब ने देश के लोगों को जो जख्म दिए थे, उनका हिसाब उसकी फांसी से पूरा हो गया है’। यह कहना है मुंबई 26/11 हमले के चश्मदीद और घायल यशोदानगर निवासी जेके मिश्रा (70) का। बुधवार सुबह बहू कंचन ने उन्हें कसाब को फांसी दिए जाने की खबर बताई तो उनके हाथ से अखबार छूट गया।
श्री मिश्र ने बताया कि 26/11 की वह रात उन्हें कभी नहीं भूलती जब कन्याकुमारी से लौट कर वे मुंबई सीएसटी स्टेशन पर कानपुर जाने वाली ट्रेन के इंतजार में लेटे थे। अचानक गोली और बमों के धमाकों से स्टेशन गूंज उठा। हर तरफ चीख-पुकार मच गई। चारों ओर लाशें, खून और लोथड़े बिखरे पड़े थ। इधर-उधर घायल तड़प रहे थे। इस दर्दनाक मंजर को देखते हुए उन्हें पता ही नहीं चला कि कब आतंकियों के हाथों से फेंके हुए बमों के छर्रो ने उनके एक पैर को लहूलुहान कर दिया। कुछ देर बाद वे बेहोश हो गए औ जब होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया। पैर के वो जख्म तो भर गए थे लेकिन जख्मों की टीस आज मिटी है। कसाब को फांसी देकर कानून ने इंसाफ किया। इस फैसले देश की लोकतांत्रिक छवि भी मजबूत हुई है।
व्यापारियों ने मिठाई बांटी
कानपुर। कसाब को फांसी दिए जाने पर खुशी जताते हुए अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने
किदवईनगर 40 दुकान मार्केट में आतिशबाजी कर मिठाई बांटी। महामंत्री ज्ञानेश मिश्रा, हरिशंकर गुप्ता, कमल त्रिपाठी, जय कुमार शर्मा, मो, कासिम, इकलाक मिर्जा, राजन चौहान, एमआई खान, राम आसरे गुप्ता, जितेंद्र गुप्ता, अन्नू बाजपेई, अजय सिंह चौहान आदि मौजूद रहे।