कर्मी रिपोर्ट को गलत बताने लगे, मारपीट पर आमादा हो गए
किसी तरह इंतजाम कर रुपये जमा किए। ऑपरेशन के कुछ दिन बाद लोगों की सलाह पर दूसरी जगह पत्नी की जांच कराई, तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इस रिपोर्ट को लेकर अस्पताल गए, तो वहां के कर्मी रिपोर्ट को गलत बताने लगे। मारपीट पर आमादा हो गए। अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ के लोग अभद्रता कर हमें बाहर निकाल दिया। सीएमओ कार्यालय में शिकायत की पर कुछ नहीं हुआ।
अस्पताल में भर्ती करने से पहले मुझे 20 हजार रुपये सर्जरी का बताया गया और भर्ती करने के बाद जब डिलीवरी हो गई तो पत्नी को एचआईवी पॉजिटिव बताकर बिल 80 हजार रुपये का पकड़ा दिया। गहने बेचकर कैसी-कैसी मुश्किलों से 80 हजार रुपये इकट्ठा कर दिए। निजी लैब और कांशीराम अस्पताल में बाद में पत्नी की जांच कराई तो वह निगेटिव निकली। -मुलायम, पति
रात 11 बजे मरीज हमारे अस्पताल आई, जिसे लेबर पेन हो रहा था। पति के पास कोई जांच रिपोर्ट नहीं थी। उस समय हमने वायरल मार्कर किट से जांच की तो उसमें महिला एचआईवी पॉजिटिव आई। हमने दोबारा जांच की तो उसमें भी पॉजिटिव आई। इसके बाद उसी प्रोटोकॉल के तहत सर्जरी की। ऐसी स्थिति में सर्जरी करने वाले डॉक्टरों का चार्ज भी बढ़ जाता है। सर्जरी के दौरान उपयोग किए गए उपकरणों को भी हटा दिया जाता है। -राजेश त्रिवेदी, उत्कर्ष हॉस्पिटल के मालिक
यह मामला पहले कभी हमारे पास नहीं आया। इस मामले की जांच के लिए एसीएमओ को निर्देश दिए हैं। जांच के बाद हकीकत सामने आएगी। अगर अस्पताल प्रबंधन दोषी मिलता है तो कार्रवाई होगी। -हरिदत्त नेमी, सीएमओ