घायल के परिजनों को समझाते कोतवाल। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। अकबरपुर के एक निजी अस्पताल ने दो दिन का 70 हजार रुपये का बिल बना दिया। घायल को रेफर नहीं करने पर नाराज परिजन और ग्रामीणों ने अस्पताल को घेर लिया। तोड़फोड़ व हंगामा की आशंका पर अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बुला ली। पुलिस के हस्तक्षेप व प्रधान की मौजूदगी में वार्ता के बाद निजी अस्पताल प्रबंधन से बिना फीस के घायल को रेफर किया। इस पर ग्रामीण लौट गए। उधर, हैलट में घायल की मौत हो गई। दो दिन में दो भाइयों के मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
बरौर के मुरलीपुर निवासी राजबाबू बाइक से भाई सुनीत के साथ शनिवार रात घर लौट रहे थे। मांवर गांव के पास वाहन की टक्कर से राजबाबू (34) की मौत हो गई थी। वहीं, गंभीर घायल सुनीत (28) को अकबरपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आईसीयू में भर्ती सुनीत को परिजन देख नहीं पा रहे थे। उन्होंने उसे रेफर करने को कहा तो अस्पताल प्रबंधन ने 70 हजार रुपये का बिल बता दिया। परिजनों ने प्रधान व अन्य परिचितों को इसकी जानकारी दी। सोमवार सुबह तीन ट्रैक्टरों से परिजन व सौ से अधिक ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। भीड़ देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। कुछ देर में कोतवाल पुलिस बल लेकर पहुंच गए। पुलिस के हस्तक्षेप पर प्रधान धर्मेंद्र की मौजूदगी में वार्ता हुई। करीब एक घंटे की जद्दोजहद के बाद इलाज का खर्चा न लेने पर अस्पताल प्रबंधन सहमत हुआ और घायल को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल इमरजेंसी में डॉ. पवन पार्या ने हालात नाजुक होने पर उसे हैलट भेजा। दोपहर बाद हैलट में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। एक दिन के अंतराल पर दूसरी मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया। पिता फूलचंद्र, मां राधारानी व पत्नी पूजा रोने बिलखने लगीं।
कोतवाल विनोद पांडेय ने बताया कि परिजन घायल को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना चाहते थे। वार्ता के बाद निजी अस्पताल से घायल को जिला अस्पताल भेज दिया गया था। परिजनों की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
धारा 144 लागू और लग गई भीड़
कानपुर देहात। विधानसभा चुनाव को लेकर धारा 144 लागू है। भीड़ एकत्र होने पर रोक है। वहीं मुरलीपुर, बरौर से तीन ट्रैक्टरों से एक सौ से अधिक ग्रामीण सोमवार सुबह माती रोड पर निजी अस्पताल के बाहर इकट्ठा हो गए। काफी महिलाएं भी ग्रामीणों के साथ आई थी। हालांकि भीड़ एकत्र होने की भनक कोतवाल को नहीं लग सकी। निजी अस्पताल प्रबंधक ने तोड़फोड़ व हंगामे की आशंका जता जब 11 बजे फोन किया तब कोतवाल को जानकारी हुई। भीड़ से सड़क पर यातायात धीमा हो गया। दोपहर में इसी बीच यहां से प्रेक्षक की कार निकली तो कोतवाल ने जल्दी से आगे के वाहनों को हटवाकर प्रेक्षक की कार निकलवाई।