हाईकोर्ट ने पांच प्रश्नों पर हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था, जबकि एक प्रश्न जिसके चारों विकल्प गलत थे, उस पर अभ्यर्थियों को नंबर देने के आदेश दिए थे। इसमें कोर्ट द्वारा यह शर्त भी लगाई गई थी कि यह नंबर उन अभ्यर्थियों को दिया जाएगा ,जिन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की है और एक नंबर से फेल हो गए हैं।
हाईकोर्ट के फैसले से नाखुश यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और अब वहां से भी अभ्यर्थियों की जीत हुई है। इस फैसले से पूरे प्रदेश के एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों के शिक्षक बनने की राह खुल गई है। इनमें जनपद इटावा से भी एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थी शिक्षक बन जाएंगे।
एक नंबर से पास होने से रह गए थे
शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल होने के लिए सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को 150 में 97 और ओबीसी व एससी श्रेणी के अभ्यर्थियों को 90 अंकों की जरूरत थी। कई परीक्षार्थी एक नंबर से परीक्षा पास करने से रह गए। जब आंसर सीट ऑनलाइन की गई, तो पता चला कि एक प्रश्न के चारों विकल्प गलत थे। इसी को आधार बनाकर यह अभ्यर्थी कोर्ट चले गए, जहां से उन्हें जीत मिली।