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Kanpur News: 6.25 लाख भवन स्वामियों को मिलेगा नामांतरण शुल्क से छुटकारा

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नगर विकास मंत्री और एमएलसी अरुण पाठक। - फोटो : स्वयं
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कानपुर। पूरे प्रदेश में शुक्रवार को एकसमान नामांतरण शुल्क का शासनादेश जारी होने का फायदा शहर के करीब सवा छह लाख भवन स्वामियों को मिलेगा। उन्हें एक फीसदी नामांतरण शुल्क से छुटकारा मिल जाएगा। वे उत्तराधिकारी के रूप में न्यूनतम 500 रुपये और नई संपत्ति खरीदने पर नगर निगम में अधिकतम 10,000 रुपये शुल्क देकर नामांतरण दाखिल-खारिज करा सकेंगे। स्थानीय सदन में अंगीकृत होते ही संशोधित नियम लागू हो जाएगा।
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नगर निगम डीएम सर्किल रेट के हिसाब से संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क लेता है। यह प्रदेश के अन्य नगर निगमों, नगर पंचायतों और नगर पालिका परिषदों में सर्वाधिक है। यहां करीब आवासीय और व्यावसायिक सवा छह लाख भवन हैं। कोई व्यक्ति एक करोड़ का भवन खरीदता है तो उसे नगर निगम में इसका नामांतरण कराने के लिए एक लाख रुपये शुल्क जमा करना पड़ता है। विज्ञापन सहित अन्य शुल्क अलग से लिए जाते हैं। इस मद में नगर निगम को हर साल करीब 25 करोड़ रुपये की आमदनी होती है।

एमएलसी अरुण पाठक के साथ ही पार्षद पवन गुप्ता ने नगर निगम सदन में यह मामला उठाया। विभिन्न संगठनों ने भी अन्य नगर निगमों की तरह यहां भी न्यूनतम नामांतरण शुल्क लागू करने की मांग की थी। अमर उजाला में यह मामला कई दिन तक प्रमुखता से प्रकाशित हुआ। एमएलसी ने पिछले साल अगस्त में यहां लागू नामांतरण शुल्क का विरोध शुरू किया। उन्होंने इसे शासनादेश के विपरीत बताते हुए प्रमुख सचिव, नगर विकास मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक से मिलकर ज्ञापन दिया था। इससे जनता पर अतिरिक्त कर का भार पड़ने का भी हवाला दिया था। जनसामान्य की असुविधा को दूर करते हुए इसमें एकरूपता लाने के लिए 9 मई को शासनादेश जारी हुआ।
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हजारों लोगों ने नहीं कराया नामांतरण
10 हजार से ज्यादा शहरवासी शुल्क ज्यादा होने की वजह से नगर निगम में नामांतरण नहीं करा रहे थे। एक साल में करीब 250 लोगों ने नामांतरण का आवेदन करने के बाद शुल्क जमा नहीं किया था। एकसमान नामांतरण शुल्क का शासनादेश जारी होने से इन सभी को राहत मिली।

जमा कर चुके लोगों का शुल्क वापस मिलेगा
शासनादेश जारी होते ही तमाम लोग सवाल करने लगे हैं कि नगर निगम ने जिन भवन स्वामियों से एक फीसदी नामांतरण शुल्क ले लिया है, क्या उसे वापस किया जाएगा या इस अतिरिक्त धनराशि को गृहकर में समायोजित किया जाएगा। एमएलसी अरुण पाठक कहते हैं कि नगर निगम ने जितना ज्यादा नामांतरण शुल्क लिया है, उसे मानवता के नाते भवन स्वामियों के गृहकर में समायोजित करना चाहिए।
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