कानपुर। दो दिन हुई बारिश-आंधी और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी 50 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सरसों की पकी फसल को हुआ है। गंगा किनारे लगाए गए खीरा-ककड़ी, करेला और लौकी के पौधे तेज आंधी की वजह से टूट कर बिखर गए हैं। किसानों का कहना है कि कटी फसल के सड़ने का भी खतरा है। लागत निकालना भी मुश्किल है। इधर, राजस्व विभाग की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
खेतों में पककर खड़ी फसलों की कटाई और मड़ाई का समय आया तो जिले में शनिवार और फिर रविवार की शाम बारिश और ओलावृष्टि कहर बन कर टूट पड़ी। इससे गेहूं और तिलहन की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। बिठूर के कटरी, बरहट बांगर, कुरसौली, परगही, टिकरा और नौरंगाबाद समेत अन्य गांवों में पकी गेहूं और तिलहन की फसलें खेतों में पसर गई हैं। कुरसौली के किसान रामचंद्र शुक्ला ने कहा कि गेहूं की कटी फसल मड़ाई के लिए पड़ी थी। बारिश की वजह से पूरी फसल गीली हो गई है। फसल के सड़ने का खतरा है।
बरहट बांगर के किसान बालेंद्र सिंह ने कहा कि इस बार सरसों और लाही की फसल अच्छी थी। कटाई-मड़ाई के समय आसमानी आफत की वजह से सरसों की 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल खेतों में ही झड़ गई है और बाकी जमीन पर बिछ गई है। बिल्हौर तहसील क्षेत्र के बीरामऊ गांव के किसान शैलेंद्र अवस्थी ने कहा कि कटाई और थ्रेसरिंग का काम रुक गया है। फसलें तेज हवा के कारण खेतों में ही टूट गई है। काटने पर दाने खेतों में ही गिर जाएंगे। बिल्हौर के तहसीलदार अभिनव चंद्रा ने कहा कि फसलों के नुकसान का आकलन के लिए राजस्व निरीक्षकों और लेखपालों की टीम लगाई गई है।
घाटमपुर क्षेत्र के सरैया निवासी किसान महेंद्र प्रसाद ने कहा कि 14 बीघा पकी खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। लागत और किराया की भरपाई कैसे होगी, अब यही चिंता है। मुइया निवासी किसान अनिल शुक्ला ने बताया कि उनकी 25 बीघा गेहूं की पकी खड़ी फसल पूरी तरह से जमीन में बिछ गई है। कटाई के साथ साथ मड़ाई में समस्या आएगी और दाने की क्वालिटी भी खराब होगी। एसडीएम अविचल प्रताप सिंह ने कहा कि रिपोर्ट आने पर फसलों की वास्तविक क्षति स्पष्ट हो सकेगी।
नरवल क्षेत्र के पुरवामीर गांव के किसान मुन्ना सिंह, दिनेश सिंह, उमेंद्र सिंह, सुरेश कुमार, चौधरी सिंह समेत अन्य ने कहा कि तेज हवा से फसल पहले ही गिर चुकी थी। आंधी और बारिश ने उसे पूरी तरह जमीन पर बिछा दिया है। यही स्थिति रही तो लागत तक नहीं निकल पाएगी। राजस्व विभाग का कहना है कि लेखपालों की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार जिले में फसलों के नुकसान की सूचना नहीं है। एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने रविवार को कहा कि फसल के 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर सरकार की ओर से पीड़ित किसान को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। इससे कम नुकसान होने पर मुआवजा नहीं दिया जाता है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल फसलों के नुकसान की सूचना नहीं है। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का सर्वाधिक असर शहर क्षेत्र में था। सभी तहसीलों के लेखपाल विस्तृत सर्वे कर रिपोर्ट देंगे तो उसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।