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Kanpur News: बचाव दल पर उठे सवाल, सिर की हड्डियां चकनाचूर मिलीं

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कानपुर। काकादेव में सवारियों से भरे ऑटो पर भारी भरकम बरगद का पेड़ गिरने के बाद काश समय राहत बचाव कार्य टीम पहुंच जाती तो सास और चालक जिंदा होते। सास झमुना देवी को क्षतिग्रस्त ऑटो से निकालने में जहां दो घंटे का समय लग गया वहीं, चालक सोनू डेढ़ घंटे तक फंसा रहा। पुलिस, दमकलकर्मी, विद्युतकर्मी, वनकर्मी अगर जल्द अपना काम शुरू करते तो घायलों को समय से अस्पताल पहुंचा कर उनकी जान बचाई जा सकती थी।
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यह आरोप झमुना देवी के दामाद मिथुन और सोनू के बड़े भाई विक्रम ने लगाए। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों के सिर की हडिड्यां चकनाचूर मिलीं। खून का धक्का बनने, मस्तिष्क पर भारी दबाव पड़ने से कोमा में जाने से मौत की पुष्टि हुई है।नवाबगंज के मकड़ीखेड़ा निवासी सेवानिवृत्त सीएसए कर्मी हीरालाल की पत्नी झमुना देवी (66) अपनी बेटी सीएसए में लिपिक ज्योत्सना और राजकुमारी के साथ शनिवार शाम मकड़ीखेड़ा निवासी सोनू निषाद (35) की ऑटो बुक कराकर कुलवंती अस्पताल गई थीं। लौटते समय अस्पताल के पास ही कई साल पुराना बरगद का पेड़ ऑटो पर गिर गया। हादसे में चालक सोनू और वृद्धा झमुना की दबकर मौत हो गई थी। वहीं बेटियां घायल हो गईं थीं।
हादसे के बाद दूसरे दिन निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती ज्योत्सना को डॉक्टर ने 24 घंटे के पर्यवेक्षण में बताया है। पोस्टमार्टम हाउस में मां का शव कफन में देख बेटी राधा बिलख पड़ीं। वहीं, चालक सोनू चार भाइयों विक्रम, रवि, रोहित में दूसरे नंबर का था। पिता वेदलाल लकवाग्रस्त हैं। मां छविला गृहिणी हैं। सोनू की पत्नी ज्ञान देवी बेटी अर्पिता के साथ पति को छोड़ मायके में रहती है। शनिवार शाम 7:30 बजे पुलिसकर्मी ने फोन कर हादसे में मौत की बात बताई थी। वहीं, राहत बचाव में जुटी टीम का कहना था कि चाह कर भी तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि में बचाव कार्य नहीं शुरू हो पा रहा था। फिर भी टीम ने भीगते हुए पांच घंटे तक मोर्चा संभाला।
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