प्रदेश सरकार ने जाजमऊ में 50 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। ट्रीटमेंट प्लांट के लिए चेन्नई स्थित सेंट्रल लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएलआरआई) डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगा और यही इसकी मॉनीटरिंग भी करेगा।
डीपीआर बनाने के लिए सरकार ने आठ करोड़ रुपये मंजूर भी कर लिए हैं। शनिवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में चमड़ा कारोबारियों के साथ हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई है।
जाजमऊ में अभी 36 एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट है। जहां से पानी ट्रीट करके गंगा में छोड़ा जाता है। लेकिन प्लांट के पूरी क्षमता से न चल पाने के कारण बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट के ही पानी गंगा में जाता है।
अब सरकार यहीं पर 50 एमएलडी का नया प्लांट लगाएगी। जिससे पानी ट्रीट किया जाएगा। नया प्लांट बनने के बाद 36 एमएलडी प्लांट का उपयोग केवल सीवरेज के लिए होगा।
चमड़ा कारोबारी अशरफ रिजवान ने बताया कि शनिवार को मुख्य सचिव, चमड़ा कारोबारियों, सीएलआरआई के सदस्यों के साथ बैठक में मुख्य सचिव ने ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सीएलआरआई को डीपीआर बनाने और प्लांट की निगरानी करने का काम सौंपा।
उन्होंने बताया कि जाजमऊ में नया प्लांट बनाने के लिए तीन साल से मांग की जा रही थी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर राजेश कुमार ने बताया कि शनिवार को मुख्य सचिव ने बैठक में फैसला किया है।