कानपुर। जिले में 5,188 स्कूलों में से 4,802 के पास छात्र-छात्राओं के लिए कोई परिवहन सुविधा नहीं है। केवल 386 स्कूलों ने ही छात्र-छात्राओं को लाने और ले जाने के लिए वाहन की सुविधा होने का दावा किया है। इन स्कूलों ने 980 बसों और वैन का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया है।सबसे ज्यादा दो हजार परिषदीय और 50 माध्यमिक विद्यालयों में वाहन नहीं हैं।
15 अप्रैल तक सभी स्कूलों को उप्र एकीकृत स्कूल वाहन प्रबंधन पोर्टल पर अपने वाहनों की जानकारी देनी थी। अब जिन स्कूलों के पास वाहन नहीं हैं उन्हें लिखित शपथ पत्र देना होगा। इसमें बताना होगा कि वह अपने स्तर से बच्चों को लाने और ले जाने का कार्य नहीं करा रहे हैं। एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार ने बताया कि यदि बाद में बिना अनुमति स्कूल के वाहन से बच्चों को लाने और ले जाने की बात सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों में जाकर की जांच
परिवहन विभाग ने स्कूल-स्कूल जाकर वाहनों की तकनीकी जांच की है। अब तक करीब 90 फीसदी वाहनों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में स्कूल वाहनों के लिए 26 बिंदुओं पर मानक तय किए गए हैं। इनमें सीट बेल्ट, फायर सिलिंडर, जीपीएस सिस्टम और स्पीड गवर्नर शामिल हैं। वाहन का रंग पीला होना और दोनों तरफ स्कूल का नाम लिखा होना भी अनिवार्य है। मानकों पर खरे न उतरने वाले वाहनों पर कार्रवाई तय है।