इटावा। बुलंदशहर में कंटेनर और ट्रैक्टर-ट्राॅली की भिड़ंत में 11 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। इसके बाद भी विभागीय अफसरों की नींद नहीं टूटी। परिवहन विभाग की ओर से कोई अभियान न चलने से जिले में 428 ट्रैक्टर-ट्राॅली बिना फिटनेस के बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन ट्रैक्टर-ट्राॅलियों में रिफ्लेक्टर भी नहीं लगे हुए हैं। जिस कारण से यह हादसों की वजह बनते हैं।
परिवहन विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कुल 14,348 ट्रैक्टर ट्राॅली पंजीकृत हैं। आठ माह में 428 की अभी तक फिटनेस नहीं हुई है। कागजों में यह ट्रैक्टर-ट्राॅली कृषि कार्य के लिए हैं, लेकिन इनका ज्यादातर इस्तेमाल सड़कों पर माल व सवारियों को ढोने में किया जा रहा है। दिन हो या रात, हाइवे पर चौतरफा ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली मौत बनकर दौड़ रही हैं। इन पर न तो रिफ्लेक्टर लगे हैं और न ही रेडियम। बिना लाइसेंस के अधिकांश लोग इनको दौड़ा रहे हैं। किशोरों को भी ट्रैक्टर की कमान सौंप दी जा रही है। यही कारण है कि आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस ओर यातायात विभाग अनदेखी करता रहता है। बड़ी घटना होने पर अफसरों की आंख खुलती है। इसके बाद अभियान चलाकर कुछ पर कार्रवाई कर कागजी कार्रवाई पूरी कर ली जाती है। मामला थमते ही पहले की तरह रोड पर ट्रैक्टर ट्राॅलियां बेखौफ होकर दौड़ने लगती हैं।