अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। मध्य प्रदेश में बांध के जल संग्रह क्षेत्रों में बारिश थमने से बांदा जनपद मेें बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। बारिश में आई कमी के चलते गंगऊ और बरियारपुर बांधों से केन नदी में छूट रहा पानी अब लगभग आधा हो गया है।
बांध और केन नदी का जल स्तर भी कम हो रहा है। उधर, बरियारपुर में गिराए गए 33 फाटक के ऊपर से शनिवार को भी छह फीट मोटी जल धारा बहकर केन नदी में गिरती रही।
पिछले कई दिनों में मध्य प्रदेश की घाटियों में हुई तेज बारिश से गंगऊ और बरियारपुर बीयर रातोंरात उफना गए थे। हालांकि सिंचाई विभाग ने बारिश खत्म हो जाना मानकर निर्धारित समय 15 अक्तूबर से एक माह पहले ही बरियारपुर बीयर के सभी 163 फाटक खड़े कर दिए थे।
लेकिन फाटक खड़े करने के चौथे दिन ही बांध उफना गया। सिंचाई विभाग (बांदा) ने आनन-फानन में 33 फाटक गिराकर पानी को रास्ता दिया। गंगऊ से एक लाख और बरियारपुर से 80 हजार क्यूसिक पानी डिस्चार्ज होने से नदी में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी करतेे हुए शुक्रवार को केन नदी किनारे बसे लगभग आधा सैकड़ा से ज्यादा गांवों मेें मुनादी कराकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान जाने के लिए कहा था। बाढ़ को लेकर इन गांवों मेें दहशत थी।
शनिवार को गंगऊ का जल स्तर लगभग चार फीट घटकर 736 फिट पर आ गया। डिस्चार्ज भी एक लाख से घटकर 46320 क्यूसिक हो गया। इसी तरह बरियारपुर का जल स्तर 615 से घटकर 613 फीट हो गया। केन नदी में गिर रहा पानी भी घटकर लगभग 22 हजार क्यूसिक हो गया। बीते 24 घंटे के अंदर केन नदी का जल स्तर लगभग एक मीटर घटकर 97 मीटर हो गया है।
10 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घटना जारी है। हालांकि केन नदी का पानी पहुंच जाने से चिल्ला घाट में यमुना नदी में 20 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पानी बढ़ने लगा है। शनिवार को शाम यमुना का जल स्तर 87 मीटर पर था। खतरे का निशान केन मेें 104 और यमुना नदी पर 100 मीटर पर है।
-गंगऊ और बरियापुर से पानी का डिस्चार्ज घटा
-बरियारपुर में 33 फाटकों से पानी का बहाव जारी
-केन नदी में भी घटने लगा जल स्तर