गंगा बेसिन प्राधिकरण की गुरुवार को दिल्ली में हुई बैठक में गंगा रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के पहले फेस के लिए 40 करोड़ रुपये आवंटित करने पर सहमति बन गई।
इस धनराशि से बिठूर के घाटों की मरम्मत, सुंदरीकरण सहित अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे। दूसरे, और तीसरे फेस में मिलाकर 116 करोड़ रुपये मिलेंगे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) और वर्ल्ड बैंक के अफसरों की मौजूदगी में केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज ने कानपुर के लिए बने 343 करोड़ रुपये के गंगा रिवर फ्रंट डवलपमेंट प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण किया।
वीसी के अनुसार इस परियोजना के प्रथम फेस में प्रस्तावित 40 करोड़ के कार्यों का प्रस्तुतीकरण देख गंगा बेसिन प्राधिकरण और वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों ने तुरंत सहमति दे दी।
इस धनराशि से बिठूर के ऐतिहासिक घाटों की सीढ़ियों की मरम्मत, आधुनिक शौचालय, स्ट्रीट लाइटें, स्नानागार, कपड़े बदलने के लिए कक्ष का निर्माण, पार्किंग, घाटों को आपस में जोड़ने आदि विकास कार्य होंगे। दूसरे और तीसरे फेस में 38 - 38 करोड़ रुपये के विकास कार्य होने हैं। दूसरे फेस में ध्रुव टीला और उसके आसपास के क्षेत्र को शामिल किया गया है।
वीसी ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्राधिकरण की तरफ से गंगा रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के प्रोजेक्ट की शुरआत के लिए सहमति मिल गई है। इससे श्रद्धालुओं सहित जनसामान्य को सुविधाएं मिलेंगी। गंगा में प्रदूषण रोकने में भी मदद मिलेगी।
नदी के 100 मीटर के भीतर निर्माण नहीं
एनजीटी ने आदेश में कहा है कि नदी के 100 मीटर क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होगा। साथ ही प्राधिकरण यह सुनिश्चित करे कि स्थायी और अस्थायी किसी भी तरह की संरचना नदी के 100 मीटर दायरे में न बने।
जाजमऊ सीईटीपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना
नई दिल्ली। उत्तराखंड के बाद अब उत्तर प्रदेश में कानपुर के चमड़ा उद्योगों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल फैसला देगा। स्वच्छ गंगा मुहिम के पहले चरण के तहत दूसरे भाग में यह फैसला आएगा। ग्रीन पैनल ने कानपुर में जाजमऊ के कचरा शोधन यंत्र (सीईटीपी) पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
इसके अलावा ताहा टैनर्स नाम की यूनिट के जरिए दोबारा ऑपरेशन शुरू करने की मांग याचिका का निपटारा करते हुए प्राधिकरणों से इस यूनिट की जांच करने का आदेश दिया है। प्राधिकरणों को एक महीने में जांच कर बताना होगा कि यह यूनिट प्रदूषण नहीं कर रही। इसके बाद ही संबंधित यूनिट को चलाने की अनुमति दी जाएगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को यह आदेश दिया। ग्रीन बेंच ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जाजमऊ सीईटीपी पर लगाए गए एक लाख रुपये जुर्माने की राशि को वसूलने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा सीईटीपी जाजमऊ को तीन महीने के भीतर यूपीसीबी से अनुमति लेनी होगी।
मालूम हो कि हाल ही में पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कानपुर स्थित टेनरियों को स्थानांतरित किए जाने के संबंध में पूछा था और कड़ी फटकार भी लगाई थी। अब गंगा सफाई मुहिम के दूसरे भाग में आने वाला आदेश इन टेनरियों का भविष्य तय करेगा।