उत्तर प्रदेश में उच्च स्तर पर शिक्षा प्राप्त युवाओं को जॉब हासिल करना दूभर हो गया है। हाईटेक शिक्षा यानि पीएचडी जैसी डिग्री के बाद भी रोजगार में आ रही अड़चनों से प्रदेश में 37 पीएचडी डिग्री धारक ग्राम प्रधान बन गए। इनमें पिछड़े क्षेत्र बुंदेलखंड से भी दो प्रधान शामिल हैं। 92 युवाओं ने एमबीए, बीटेक, एमसीए, निफ्ट, बीई, इलेक्ट्रिकल, एमफिल जैसी उच्च डिग्रियां हासिल करने के बाद अपनी मेधा गांव की प्रधानी में खपा रहे हैं। यह आंकड़ा और खुलासा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त हुआ है।
पिछले वर्ष हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रदेश में चुने गए ग्राम प्रधानों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित प्रधान चुने गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर को प्रदेश के ग्राम विकास विभाग द्वारा जन सूचना अधिकार में दी गई सूचना में 37 ग्राम प्रधान पीएचडी और 92 अति उच्च शिक्षित हैं। पीएचडी ग्राम प्रधानों में 6 महिलाएं भी हैं। इनमें महोबा की वंदना, आजमगढ़ की तस्लीम जमाली, गोंडा की उर्मिला सिंह व कृष्णा सिंह प्रतापगढ़ की डा.शशिबाला सिंह और रायबरेली की सुनीता शामिल हैं। पुरुष पीएचडी प्रधानों में बांदा के डा.सतीश कुमार, कानपुर नगर के प्रवीणचंद्र व सुधीर कुमार, अंबेडकर नगर के दिनेश, आजमगढ़ के मीशम अब्बास, उन्नाव के भगवान बक्श सिंह, कुशीनगर के अनिरुद्ध, कानपुर देहात के हरिपाल, गाजीपुर के रामश्रय और अजय प्रताप, गोंडा के चंद्रशेखर सिंह, देवरिया के मनीष कुमार शुक्ला, प्रतापगढ़ के अमिताभ, बरेली के मोहम्मद अकरम, बाराबंकी के विजेंद्र कुमार, वाराणसी के दिनेश कुमार, अशोक कुमार व दीपक और सिद्धार्थ नगर के पवन, कन्नौज के अवधेश, हाथरस के डा.वीरेंद्र प्रताप सिंह, भदोही के अजीत कुमार शामिल हैं।
इनके अलावा बुंदेलखंड में झांसी में कुलदीप (बीटेक), इटावा में कुमारी प्रियंका यादव (निफ्ट फैशन डिजाइनर), बलिया के आलोक सिंह (बीई), बाराबंकी के रामशरण लाल (बीएससी एमएस) और अल्फिशा (बीटेक), बागपत की गुलशन (बीटेक), बुलंदशहर में रिंकू व अनुज और बलरामपुर में आलोक सिंह, कानपुर नगर में धीरेंद्र सिंह (एमबीए), कुशीनगर में विजय प्रताप सिंह (बीए एमएस), कन्नौज में नाहर सिंह यादव, मऊ में मुकेश राय, मुरादाबाद में मोहम्मद मेराज व मोहम्मद वारिस, बिजनौर में नवनीत कुमार व प्रिंस कुमार, गौरव कुमार, सिद्धानगर में सर्वेश (बीटेक), मऊ में बबिता (एमबीए), मथुरा में योगेंद्र सिंह (बीएससी एमसीए), मुरादाबाद में सुमित, मेरठ में संदीप, मैनपुरी में पूनम यादव, बिजनौर में सचिन, फिरोजाबाद में शैलेंद्र व सत्यपाल, शैलेंद्र शर्मा और सचिन कुमार व प्रबल प्रताप सिंह, (एमबीए) हाथरस में संजय कौशिक (एमसीए) व उपवेंद्र सिंह चौधरी (बीसीए, एमसी, एसईसीसीएनपी), रामपुर में ताज मोहम्मद और शाहजहांपुर में दिलीप कुशवाहा (एमबीए) व जीवेंद्र कुमार (एमसीए) शामिल हैं।
जो देश के लिए कर सकते थे वो गांवों में हुए सीमित
आरटीआई में प्रधानों की सूचना मांगने वाले सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर का कहना है कि उच्च शिक्षा के बाद भी युवा मायूस हैं। उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार जॉब नहीं मिल रहे। ऐसे में मजबूरन वह देश और प्रदेश के लिए कुछ करगुजरने की तमन्ना को मन में मसोस कर गांव तक ही सीमित हो रहे हैं। उच्च शिक्षित युवाओं को बेहतर जॉब न मिलने के पीछे घूसखोरी और जातीय आरक्षण भी बड़ा कारण है। यह युवक लोकसभा और विधान सभा जैसे सदनों में होना चाहिए न कि ग्राम पंचायतों में।