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Kanpur News: आठ साल से लेखाजोखा न देने वाले 36 सचिव रडार पर

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कानपुर। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर खर्च हुई धनराशि का हिसाब न देने वाले 36 सचिव अब सीधे जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की नजर में आ गए हैं। करीब आठ वर्षों से लेखाजोखा न जमा करने पर जिलाधिकारी ने सभी सचिवों की बुधवार को बैठक बुला ली है। कई सचिव आनन-फानन लेखाजोखा लेकर मंगलवार को डीपीआरओ कार्यालय पहुंच गए लेकिन उन्हें लौटा दिया गया।
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दरअसल, शासन के निर्देश पर ऑडिट विभाग पिछले कुछ समय से ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों का लेखा-जोखा जुटाने में लगा है। जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच कराए गए कार्यों के 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का लेखाजोखा (प्रस्तर) जमा नहीं किया गया है। पांच सचिव ऐसे भी हैं जिन पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हिसाब बाकी है। इन सचिवों को दो साल में कई बार नोटिस जारी किए गए। चार से पांच बार वेतन रोकने जैसी कार्रवाई भी की गई। छह सचिवों को ग्राम पंचायतों से हटाकर ब्लाॅक में संबद्ध कर दिया गया। इनसे बीडीओ ने कोई काम भी नहीं लिया। इसके बावजूद सचिवों ने लेखा-जोखा जमा करना जरूरी नहीं समझा। लगातार लापरवाही के चलते यह मामला लंबित होता गया और जिले की छवि पर भी असर पड़ने लगा। अब जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। बुधवार को बुलाई गई बैठक में सभी सचिवों से जवाब-तलब किया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित सचिवों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

ये सचिव रडार पर
पुनीत मिश्रा, सिद्धांत कुमार, अभिषेक कुमार, मुकेश उपाध्याय, राज कमल कटियार, अनुज मिश्रा, पूजा तिवारी, गोविंद सिंह, अनिल शुक्ला, रवि वर्मा, अमित कुमार द्विवेदी, पीयूष सिंह, उदय प्रताप, आजेंद्र तिवारी, अनिल कुमार शाक्य, राजेश पाल, असीम सोनकर, शाश्वत श्रीवास्तव, समीर गुप्ता, हेतराम, रवि यादव, प्रभात मोहन श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह, अभिषेक सिंह, आशीष सिंह, शिवपाल सिंह समेत 36 सचिव के नाम शामिल हैं।
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