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स्मृति शेष: 31 साल पहले गंगा किनारे गूंजी थी आशा भोसले की आवाज, कानपुर से रहा गहरा नाता

Mon, 13 Apr 2026 10:28 AM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

स्मृति शेष आशा ताई: साल 1995 में इंडियन एक्स सर्विसेज लीग, सेना और पुलिस महिला कल्याण संगठन ने  कार्यक्रम करवाया था। कार्यक्रम में गंगा भैया में जब तक पानी रहे...गाने से की शुरुआत थी। वंदे वंदे मातरम गीत पर जवान झूमे थे। 
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होटल लैंडमार्क में 1995 में पहुंची थीं गायिका आशा भोसले (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मशहूर गायिका आशा भोसले का कानपुर से गहरा नाता रहा है। उनके निधन की खबर से शहर के प्रशंसकों में शोक की लहर है। शहर में कई जगह सभाएं आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। करीब तीन दशक पहले 1995 में वह कानपुर आई थीं और कैंट में अपने सुरों का जादू बिखेरा था।
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इंडियन पूर्व सैनिक लीग, सेना और पुलिस महिला कल्याण संगठन ने आशा भोसले को वीर नारी सम्मान समारोह में आमंत्रित किया था। यह आयोजन कैंट में हुआ था। आशा भोसले ने देशभक्ति से प्रेरित गीत गाकर प्रशंसकों में जोश भर दिया था। उस कार्यक्रम में अभिनेता जॉनी लीवर भी मौजूद थे। वे रिहर्सल के दौरान सीढ़ियों से गिरकर घायल हुए थे। भूतपूर्व वायुसैनिक अंबिका पाल ने बताया कि आशा भोसले के गीत सुनने बड़ी संख्या में प्रशंसक आए थे। उनकी आवाज का जादू लोगों पर सिर चढ़कर बोल रहा था। प्रशंसकों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल लगाना पड़ा था। उस वक्त पुलिस अधीक्षक डीएन सांवल भी इस कार्यक्रम में पहुंचे थे। आशा भोसले की मधुर आवाज और मंच प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया था। गजल गायक प्रदीप श्रीवास्तव ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे संगीत क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

सौभाग्यशाली हो जो गंगा किनारे रहते हो
कार्यक्रम से पहले लैंडमार्क होटल में एक प्रेसवार्ता आयोजित की गई थी। मंच से आशा भोसले ने कानपुरवासियों को आशीर्वाद दिया था। उन्होंने कहा था कि कानपुरवासी सौभाग्यशाली हैं जो गंगा किनारे रहते हैं। उन्हें मां गंगा का आशीर्वाद मिल रहा है। उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के लोकप्रिय गीत "गंगा भैया में जब तक पानी रहे... से शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरहिट फिल्मी गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।


 

अचार की शौकीन पर खाने से बचती थीं
निदेशक जीतू सिंह ने बताया कि आशा भोसले खाने की बहुत शौकीन थीं। उन्होंने कहा था कि उनके खाने में आम और मिर्च का अचार कभी न दिया जाए। ये दोनों अचार उनकी कमजोरी थे, जिनसे गला खराब हो सकता था। आशा भोसले के कार्यक्रम ने कानपुर में गहरा प्रभाव छोड़ा था। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। बड़ी संख्या में लोगों का जुटना उनकी लोकप्रियता का प्रमाण था। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ी थी। यह आयोजन शहर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक घटना बन गया था।
 
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पिता की आर्थिक स्थिति देख गाना शुरू किया
रंगकर्मी ओमेंद्र कुमार ने बताया कि दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित आशा भोसले का एक बार कानपुर में कार्यक्रम बारिश के कारण निरस्त हुआ था। बाद में वह दोबारा शहर आईं और गैरीसन ग्राउंड में कार्यक्रम आयोजित हुआ। बेटे आनंद के आग्रह पर उन्होंने इंटरव्यू में पारिवारिक संघर्षों का जिक्र किया, जिसमें पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर लता मंगेशकर ने गाना शुरू किया। प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार संगीता बाजपेई ने आशा भोसले की आवाज में अद्भुत जादू और हर शैली में उनकी पकड़ बताई। फिल्म जगत से जुड़े अजय त्रिपाठी ने इंडस्ट्री में उनके सम्मान की बात कही। कलाकारों का मानना है कि आशा भोसले का जाना संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है और गजल गायक पूजा भदौरिया ने उनकी गजलें गाकर शहर में अपनी पहचान बनाई है।
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