हत्यारोपी के वकील प्राणेश सिंह ने बताया कि राठ थानाक्षेत्र के कस्बा मोहल्ला मुगलपुरा निवासी वादी मुकदमा शिवराम यादव ने मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। न्का कहना था कि 18-19 जनवरी 2006 को रात करीब दो बजे वह, भाई वीरू कांशीराम यादव खेत से सिंचाई करके घर लौट रहे थे।
सैना रोड व मझगवां रोड बाईपास पर नहर कोठी के सामने कार में घात लगाकर बैठे जयप्रकाश उदैनिया, अजय मिश्रा, संतोष शर्मा व वीरेंद्र शर्मा निवासी उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। जयप्रकाश ने उसके भाई वीरू के सिर में व अजय मिश्रा ने उसके सीने में गोली मार दी, जिससे उसके भाई की मौके पर मौत हो गई।
चार लोगों के खिलाफ हत्या का मामला किया था दर्ज
आरोपी उन्हें भी मारना चाहते थे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करने का भरोसा दिलाने पर उन दोनों लोगों के हाथ पीछे बांध व आंखों में पट्टी बांधकर अपनी गाड़ी में डाल लिया और उन्हें ले जाकर एक निर्जन स्थान पर छोड़ दिया। राठ पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्जकर तत्कालीन विवेचक यूएस चंदेल ने जांच की।
डीआईजी के आदेश पर बदली जांच
आरोपियों की मांग व डीआईजी के आदेश पर विवेचना अप्रैल 2006 में जनपद महोबा के थाना पनवाड़ी तत्कालीन एसएचओ एमपी वर्मा को दी गई। जिन्होंने 10 माह की तहकीकात के बाद पांच जनवरी 2007 को दो हत्यारोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया।
फर्जी गवाह बना दर्ज किया मामला
अधिवक्ता ने बताया कि विवेचक एमपी वर्मा ने सभी चारों आरोपियों जयप्रकाश उदैनिया, अजय मिश्रा, संतोष शर्मा व वीरेंद्र शर्मा को क्लीनचिट दे दी थी। इस्माइल खां व आबू को फर्जी चश्मदीद गवाह बनाकर राठ कस्बा निवासी चरन यादव व नृपत यादव के खिलाफ हत्या करने का मामला दर्ज कर एक साल बाद आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया गया।
18 साल बाद मिला न्याय
दोषमुक्त हुए चरन यादव ने बताया कि मृतक उनका पारिवारिक था और एक ही पड़ोस में रहते थे। बताया कि पुलिस ने उन्हें हत्या मामले में गलत फंसा दिया। जो चश्मदीद गवाह बनाए गए वह कस्बा निवासी हैं ही नहीं, अदालत द्वारा कराई गई विवेचना में दोनों गवाह इस्माइल व आबू फर्जी पाए गए। कहा कि 18 साल बाद उन्हें न्याय मिला है। इस बीच उन्होंने अनेक समस्याओं का सामना किया। घर की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ गई। मुकदमेबाजी में करीब 15 लाख से अधिक खर्च हो गया। कहा कि विवेचक के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।