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Kanpur News: टॉयलेट क्लीनर, फिनायल बनाएंगी समूह की 30 महिलाएं

Thu, 25 Jun 2026 01:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एनआरएलएम की ओर से घरों में साफ-सफाई करने वाले उत्पाद टॉयलेट क्लीनर, फिनायल, गोट-सोप जैसी सामग्री बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद एसएचजी महिलाएं खुद का उत्पाद बनाकर स्थानीय बाजार में बिक्री करेंगी और आमदनी कर आत्मनिर्भर बनेगी।
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ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किए जाने का काम किया जा रहा है। इसके तहत अब तक जिले में नौ हजार स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब एक लाख अधिक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर खुद का कारोबार कर रही हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। शासन ने जिले के पात्र गृहस्थी व अंत्योदय कार्ड धारक परिवार की महिलाओं को समूह से जोड़ने और उन्हें उनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार करने को प्रेरित करने का लक्ष्य दिया है। विभाग के अनुसार अब तक करीब 10 हजार महिलाओं को नए या फिर पुराने समूह से जोड़कर अलग-अलग हुनर का प्रशिक्षण दिए जाने की तैयारी है।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के प्रशिक्षक पंकज कुमार ने बताया कि अलग-अलग ब्लॉक की 30 महिलाओं का एक बैच बनाकर टॉयलेट क्लीनर, फिनायल, गोट-सोप जैसे उत्पाद बनाने का ट्रेनर प्रतीक सिंह से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर इन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। साथ ही जो महिलाएं खुद का कारोबार करना चाहेंगी, उन्हें सीसीएल के तहत 1.5 लाख या बड़े स्तर पर काम करने के लिए सीएम युवा उद्यम योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ऋण दिलाया जाएगा। इन महिलाओं को कारोबार शुरू करने सहायता के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना है।
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बयान..............
समूह की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हुए अलग-अलग उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे वह खुद का काम शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी और अन्य महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा सकेंगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर इन्हें प्रमाण पत्र वितरित किया जाएगा। इससे इन्हें किसी भी कंपनी में काम पाने में आसानी होगी। अगर वे खुद का कारोबार शुरू करना चाहेंगी तो बाजार उपलब्ध कराने के साथ ऋण दिलाने में भी सहायता प्रदान की जाएगी। - मयंक कटियार, निदेशक, आरसेटी
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