कानपुर में गलन भरी ठंडक बढ़ने से सांस के रोगियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। कोरोना से ठीक हो चुके 30 फीसदी रोगी ऐसे हैं जिनकोफेफड़ों में फाइब्रोसिस होने के कारण समस्या हो रही है। इन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
हैलट, बालरोग अस्पताल, उर्सला के आईसीयू फुल हो गए हैं। प्रदूषण और गलन बढ़ने से कल्याणपुर के 63 वर्षीय पोस्ट कोविड रोगी में हार्ट अटैक के लक्षण उभर आए। उन्हें सर्वोदयनगर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्वरूपनगर के 60 साल के रोगी कोरोना से ठीक होने के बाद सामान्य स्थिति में रहे लेकिन चार-पांच दिन से उनकी तकलीफ बढ़ गई। पहले घर में ऑक्सीजन सिलिंडर ले आए। बाद में उन्हें हैलट में भर्ती कराया गया है। सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. राजीव कक्कड़ ने बताया कि पोस्ट कोविड रोगियों की स्थिति खराब हो रही है।
ठंड और प्रदूषण दोनों उनके लिए घातक है। डॉ. मुरारीलाल चेस्टहॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि ओपीडी में चार-पांच पोस्ट कोविड रोगी सांस की दिक्कत लेकर आए। उन्हें भर्ती होने का सुझाव दिया गया है।
विशेषज्ञों की सलाह
- ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच कराएं, नियंत्रित रखें।
- बच्चे, बूढ़े और कोरोना से ठीक होने वाले रोगी ठंड से बचें।
- गर्म कपड़े पहनें, सोते वक्त ध्यान रखें, रजाई में ही रहें।
- डिनर में तला-भुना और गरिष्ठ भोजन कतई न लें।
- पानी ताजा या गुनगुना करके प्रयोग में लाएं।
- गर्म कमरे से अचानक बाहर खुले में न निकलें।