28 साल बाद फिर से वही कहनी दोहराई गई है बस खिलाड़ी बदल गए हैं पहले गोपाल शर्मा थे अब कुलदीप यादव हैं। दोनों को वर्ल्डकप की संभावित टीम में चुना गया था।
एक को 1987 में जबकि दूसरे को 2015 में लेकिन दोनों को अंतिम 15 में जगह नहीं मिली। पर दोनों ही बार खिलाड़ियों के साथ सबसे ज्यादा शहरवासियों को निराशा हुई थी।
हालांकि कुलदीप का कहना है कि उन्हें किसी से कोई शिकवा, शिकायत नहीं हैे। वह भारतीय टीम में जगह पक्की करने के लिए मेहनत करते रहेंगे।
विश्वकप की संभावित टीम में कुलदीप यादव का चयन हुआ तो शहरवासियों के साथ केसीए, यूपीसीए को भी उम्मीद थी कि गंगा किनारे का यह छोरा आस्ट्रेलिया में अपनी चाइनामैन गेंदबाजी से विरोधी खिलाड़ियों के स्टंप उखाड़ेगा।
पर मंगलवार को वर्ल्डकप टीम की घोषणा के साथ यह उम्मीद टूट गई और सभी निराश हो गए। हो भी क्यों न कंपू के साथ ऐसा दूसरी बार जो हुआ है।
इस बारे में केसीए चेयरमैन डा.संजय कपूर का कहना है कि कुलदीप उदीयमान खिलाड़ी है। उनका चयन नहीं होना दुखद है।
सचिव एसएस सिंह का कहना है कि कुलदीप का चयन नहीं होना वाकई आश्चर्यजनक है वह आस्ट्रेलिया की पिचों में ज्यादा कारगर साबित होता। हालांकि इस बारे में कुलदीप यादव का रुख पूरी तरह से पॉजिटिव है।
उनका कहना है कि टीम में नहीं लिए जाने से वह परेशान नहीं है यह भी क्रिकेट का हिस्सा है। चयन नहीं होने का मतलब नहीं है कि खेल खत्म हो गया बल्कि अब तो खेल शुरू हुआ है।
मायूस होकर घर बैठना उनकी फितरत नहीं है। वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से क्रिकेट खेलते रहेंगे और भारतीय टीम में आने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।