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विवाह पंजीकरण में मुस्लिम धर्गगुरु एकमत

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अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। मंगलवार को प्रदेश सरकार ने बहु प्रतीक्षित अनिवार्य विवाह पंजीकरण नियमावाली लागू कर दी है। अब मुस्लिम समेत सभी वर्गों को विवाह पंजीकरण कराना अनिवार्य हो गया है। पंजीकरण न कराने पर सरकारी सुविधाओं का लाभ न देने का सरकार ने निर्णय लिया है। बुधवार को सरकार के फैसले पर मुस्लिम वर्ग के प्रबुद्धजनों की ‘अमर उजाला’ ने रायशुमारी की पड़ताल की। पड़ताल में विवाह पंजीकरण अधिनियम को लेकर मुस्लिम धर्मगुरु सरकार के साथ खड़े नजर आए। हालांकि उनका कहना है कि इससे शरीयत के कानून में किसी भी तरह का दखल नहीं होना चाहिए। मुस्लिम समाज के लोगों ने पंजीकरण व्यवस्था को सही ठहराते हुए देश को डिजिटल इंडिया की राह पर होना करार दिया। हां कुछ लोगों ने फर्जी की भागदौड़ होने की बात जरूर कही।

विवाह पंजीकरण कानून की कोई जरूरत नहीं थी। मुस्लिम समाज में तो वैसे भी निकाहनामे में कागजी कार्रवाई होती है। सरकार का फैसला है ज्यादा टिप्पणी ठीक नहीं होगी। हर चीज के दो पहलू होते हैं। कानून आने से रूढ़िवादी समाज से बचकर शादी करने वाले दंपति को राहत जरूर मिलेगी।
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टीएन फारूकी प्रबंधक सन्-डी सन कालेज

मुस्लिम वर्ग में निकाहनामे की व्यवस्था पहले से ही है। ऐसे में विवाह का आनलाइन रजिस्ट्रेशन होने जैसी व्यवस्था से कोई ऐतराज नहीं है। हां पति-पत्नी व उनके परिवार के सदस्यों को फर्जी भागदौड़ का बोझ जरूर झेलना पड़ेगा। सरकार का फैसला कोई गंभीर मुद्दा नहीं है। मौलाना निसार अहमद मिस्बाही शहर काजी

मुस्लिम समाज पर विवाह पंजीकरण कानून लागू किया जाना सरकार की जबरजस्ती है। हमारे समाज में तो पहले से ही लिखा पढ़ी में निकाहनामा होने की व्यवस्था है। अब बेवजह पंजीकरण के लिए रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर काटने होगा। इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा परेशान गरीब व गांव का व्यक्ति होगा। मोहम्मद अहमद जिलाध्यक्ष इंडियन मुस्लिम लीग
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योगी सरकार का फैसला स्वागत योग्य है। विवाह पंजीकरण आनलाइन होने से देश डिजिटल इंडिया की तरफ तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। वहीं विवाह का सरकारी पंजीकरण होने से वर व वधू दोनोें पक्ष कानून के दायरे में होंगे। किन्हीं भी परिस्थितियों में व्यक्ति शादी से इनकार नहीं कर सकेगा। अब समाज को समाजिक प्रताड़नाओं से राहत मिलेगी।- गौसियां खान समाज सेविका


विवाह पंजीकरण में मुस्लिम धर्मगुरु एकमत
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