कानपुर-फर्रूखाबाद ट्रैक पर मंधना स्टेशन के पास शनिवार देर रात पटरी काटकर और पैंड्रॉल क्लिप खोलकर ट्रेन पलटाने की साजिश 2 घंटा 25 मिनट तक चली।
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9:45 से 12:10 के बीच पटरी काटी गई
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कटे हुए ट्रैक की ओर इशारा करता रेलवेकर्मी
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
सोमवार को अमर उजाला टीम ने घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे ट्रैकमैन संजीव यादव और रामराज सिंह से बात-चीत की। दोनों ट्रैकमैन ने बताया कि शनिवार रात 9:45 बजे घटनास्थल खंभा नंबर 16/1 पर जब पहली बार पहुंचे तो सब-कुछ ठीक था। वापसी में 12:10 बजे जब वह दोबारा वहां आए तो पैंड्रॉल क्लिप खुले और पटरी कटी मिली। इसका मतलब 9:45 से 12:10 के बीच पटरी काटी गई और पैंड्रॉल क्लिप खोले गए।
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ट्रेन पलटाने की साजिश का मामला रेल मंत्री और रेल मंत्रालय तक पहुंचा
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रेलवे ट्रैक का निरिक्षण करते हुए रेलवेकर्मी
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
ट्रेन पलटाने की साजिश का मामला रेल मंत्री और रेल मंत्रालय तक पहुंच गया है। इस मामले पर रेल मंत्री सुरेश प्रमुख और रेल मंत्रालय ने भी रीट्विट किया है। ट्रैकमैन संजीव कुमार ने बताया कि वह साथी रामराज के साथ रात नौ बजे मंधना स्टेशन से कल्याणपुर स्टेशन तक निरीक्षण पर निकले थे। दोनों को प्रतिदिन चार किलोमीटर तक ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण करना होता है।
पटरी के एक तरफ के निरीक्षण में करीब दो घंटा देना अनिवार्य
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ट्रैकमैन संजीव यादव
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
पटरी के एक तरफ के निरीक्षण में करीब दो घंटा देना अनिवार्य है। निरीक्षण करते हुए हम दोनों 9 बजकर 45 मिनट पर खंभा नंबर 16/1 पर पहुंचे। तब तक सब ठीक था। जिस जगह हमारा निरीक्षण खत्म होता है, वहां से आगे की टीम के साथ हम निरीक्षण रजिस्टर बदलते हैं। कल्याणपुर में हमने वहां तक निरीक्षण करते आए ट्रैकमैन शिवमूरत और नानू के साथ करीब 11.15 बजे रजिस्टर की अदला-बदली की। इसके बाद पटरी के दूसरी ओर निरीक्षण करते हुए लौट पड़े।
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हमले की आशंका से बुरी तरह डर गए थे दोनों ट्रैकमैन
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ट्रैकमैन रामराज सिंह
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
ट्रैकमैन रामराज सिंह ने बताया कि वापसी में घटनास्थल पर बायीं ओर संजीव ने पैंड्रॉल क्लिप खुली देखी। उन्होंने इसकी जानकारी मुझे दी। हम दोनों ने टार्च से आसपास देखा तो पटरी भी कटी मिली। ऐसा करने वालों की आसपास मौजूदगी और हमला करने की आशंका से दोनों बुरी तरह डर गए।
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पुलिस अधिकारियों ने किया दौरा
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ट्रैकमैन से पूछताछ करते पुलिसवाले
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
हम फौरन पटरी के करीब 15 फीट नीचे स्थित झाड़ियों में कूदकर छिप गए। वहीं से बेहद धीमी आवाज में मोबाइल फोन से सीनियर सेक्शन इंजीनियर जहीर खान और मंधना स्टेशन मास्टर दर्शन सिंह को घटना की जानकारी दी। थोड़ी ही देर में सीनियर सेक्शन इंजीनियर और स्टेशन मास्टर मौके पर पहुंच गए। आरपीएफ और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने किया दौरा
एसपी वेस्ट और कल्याणपुर सीओ ने सोमवार को मौका-मुआयना किया। उन्होंने भी मामले में साजिश की आशंका जताई है। बिठूर थाने में दर्ज इस घटना के मुकदमे को 0001 नंबर दिया गया है।
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बिना सुरक्षा उपकरण करते निरीक्षण
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मंधना में रेलवे ट्रैक पर काशन लगाते हुए कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
बिना सुरक्षा उपकरण करते निरीक्षण
दोनों ट्रैकमैन ने बताया कि रात में पटरी के निरीक्षण पर निकलने के दौरान उनके पास जानवरों को भगाने तक के लिए कोई सुरक्षा उपकरण नहीं होता। घटनास्थल पर साजिशकर्ताओं से संभावित मुठभेड़ या हमले की सूरत में बचाव के लिए कोई संसाधन न होने के कारण ही वह झाड़ियों में छिप गए थे।
गंभीर होता हादसा
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ट्रैक की मरम्मत के दौरान काशन लगाकर ट्रेन को गुजारा गया
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
गंभीर होता हादसा
घटनास्थल को देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि साजिशकर्ताओं ने बड़े हादसे को अंजाम देने के लिए इसकी रेकी की थी। जिस जगह यह वारदात की गई, वहां रेल ट्रैक जमीन से करीब 15 फीट ऊंचा है। ऐसे में यदि ट्रेन पलटती तो इसके डिब्बे इतनी गहराई में नीचे गिरते। इससे हादसे की गंभीरता और बढ़ जाती।
मंधना में पटरी बदलते हुए रेलवेकर्मी
- फोटो : अमर उजाला कानपुर
बदली गई 12.50 मीटर पटरी
सोमवार को रेलवे अफसरों ने घटनास्थल पर काटी गई पटरी को बदल दिया। 12.50 मीटर लंबी नई पटरी लगाई गई है। इससे पहले कॉशन (धीमी गति) पर ट्रेनें गुजारी जा रहीं थीं।