सुबह दहशत फैलाई, शाम को छूटे अपहृत
अमर उजाला ब्यूरो
सरैयां (चित्रकूट)। डाकू गोप्पा गैंग ने सुबह कर्का गांव में बोरिंग मशीने फूंकने के बाद फायरिंग कर दहशत फैलाई और शाम को अपहृत दोनों युवकों को छोड़ दिया। पुलिस का दावा है कि लगातार की जा रही नाकेबंदी से गैंग बिखर गया था और पुलिस के दवाब में अपहृत दोनों युवकों को छोड़ दिया। जबकि इलाके में चर्चा कुछ और है।
दरअसल दो युवकों का अपहरण करने के बाद गैंग ने पूरे गांव में ऐलान किया कि यह बोरिंग मशीन उसकी अनुमति के बिना कोई न ले जाए। इस वजह से ठेकेदार ने मशीनें गांव के रामबरन यादव के डेरा में खड़ी करवा दी थी। गुरुवार को इस मशीन को ले जाने के लिए मुख्यालय निवासी ठेकेदार फूलचंद्र ने कुछ मजदूरों को भेजा था। इसकी भनक लगते ही डाकू गैंग फिर गांव आ धमका और दोनों वाहनों में आग लगा दी।
गौरतलब है कि यहां का प्रधान तुलसीराम भी डाकुओं का सताया है। इसी गोप्पा गैंग ने हैंडपंप लगवाने पर ही प्रधान को पकड़ा था और 25 हजार रुपये लेकर छोड़ा था। ग्रामीणों ने दबी जुबान में कहा कि डाकुओं का गांव में कभी भी आना रहता है। उनके खिलाफ सूचना देने वालों को जान का खतरा रहता है। उधर, पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र ने कहा कि गैंग के सदस्यों के साथ अपहृत मिथलेश, संदीप के भी होने की सूचना थी। इसी वजह से रात में मुठभेड़ के दौरान पुलिस कवरिंग फायरिंग कर रही थी। अपहृतों को जिंदा बचाना प्राथमिकता है। इसका फायदा गैंग उठा रहा है। बढ़ते पुलिस दवाब में उसने शाम को दोनों युवकों को छोड़ दिया।
ग्रामीणों को ढाल बनाते डाकू
चित्रकूट/सरैंया(ब्यूरो)। घटना के बाद मंडलायुक्त,डीएम, डीआईजी व एसपी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि डकैतों के खिलाफ पुलिस का अभियान धीमा नहीं होगा। लगातार पुलिस डकैतों को जंगल में घुसकर मुठभेड़ कर रही है, जिससे डकैतों में भी खौफ है इसीलिए डाकू निर्दोष ग्रामीणों पर कहर बरपाते हैं। कभी कभार तो ग्रामीणों को ढाल बनाकर भाग जाते हैं। डाकू बबुली कोल, गोप्पा, ललित पटेल और गौरी यादव के खिलाफ पुलिस कोई रियायत नहीं करेगी।
पुलिस ने की पूछतांछ
सरैंया । डाकू गोप्पा गैंग द्वारा अपहृतों के बदले फिरौती न मांगना और मुख्य ठेकेदार फूलचंद्र को ही जंगल में बुलाने के पीछे के राज को पुलिस जानने में जुटी रही। इस संबध में पुलिस ने ठेकेदार से बातचीत की है और पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि डाकुओें ने फूलचंद्र के चचेेरे व फूफूरे भाई का अपहरण करने के बाद मोबाइल से यही संदेश भिजवाया है कि फिरौती नहीं बल्कि फूलचंद्र को भेजो। इस घटना के बाद पूरा परिवार भयभीत रहा।