‘मैं तेरे नाम हो जाऊं तू मेरे नाम हो जाए मैं तेरा दाम हो जाऊं तू मेरा दाम हो जाए, न राधा सा न मीरा सा विरह मंजूर है मुझे, बनूं मैं रुक्मणी तेरी तू मेरा श्याम हो जाए’ ये मशहूर लाइने कवयित्री अनामिका अंबर की हैं। इन लाइनाें काे सुनने के बाद अापकाे गंगा की लहराें काे छूकर अा रही हवाअाें की ताजगी महसूस हाेगी।
बिठूर महोत्सव में कवियों के शानदार काव्य पाठ ने सभी काे मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद 'कानपुर जब तक महि शेष शीश पर है, है उदाहरण तरुणाई का, बलिदान रहेगा सदा अमर मर्दानी लक्ष्मीबाई का’... वीरांगना झांसी की रानी पर यह पंक्तियां सुनाकर लखनऊ की कवियित्री कविता तिवारी ने 1857 क्रांति की यादें ताजा कर दीं। शुक्रवार को बिठूर महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में कई शहरों से आए कवियों ने एक से एक शानदार काव्यपाठ कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी ने ‘किसी गीता से न कुरआन से अता होती है, न बादशाहों की दौलत से अता होती है, रहमतें बरसतीं हैं उन्हीं लोगों पर जिनके दामन में बुजुर्गों की दुआ होती है’ सुनाया तो हाल तालियों से गूंज उठा। अनामिका अंबर ने ‘मैं तेरे नाम हो जाऊं तू मेरे नाम हो जाए मैं तेरा दाम हो जाऊं तू मेरा दाम हो जाए, न राधा सा न मीरा सा विरह मंजूर है मुझे, बनूं मैं रुक्मणी तेरी तू मेरा श्याम हो जाए’ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मध्य प्रदेश से आए शशिकांत यादव ‘देवास’ ने ‘रामायण का वाचन करते और सुनते गुरुवाणी हैं, हिंदु मुस्लिम बाद में हैं हम पहले हिंदुस्तानी है’... सुनाकर हिंदू - मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने कांग्रेस नेता पर तंज कसते हुए कहा कि जीवन में विजयी होना चाहिए लेकिन दिग्विजय नहीं होना चाहिए। सहारनपुर के राजेंद्र राजन ने ‘दिलों में जिनके लगती है, वो आंखों से नहीं रोते जो अपने के नहीं होते किसी के भी नहीं होते’ सुनाया।