कानपुर देहात। जिले में कांग्रेस की स्थिति तीनों सीटों पर खराब रही। कन्नौज सीट से कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। जबकि इटावा सीट से भाजपा से सांसद रहे अशोक दोहरे को कांग्रेस ने टिकट देकर काफी उम्मीद लगाए थे लेकिन सिकंदरा विधानसभा वह अपनी पकड़ साबित नहीं कर सके। कांग्रेस प्रत्याशियों में अकबरपुर सीट से राजाराम पाल फिर भी गिनती में रहे।
लोकसभा चुनाव में विभिन्न मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी कांग्रेस जनता के बीच नहीं टिक सकी। अकबरपुर लोकसभा सीट से कांग्रेेस प्रत्याशी राजाराम पाल की जनता के बीच पकड़ अच्छी मानी जाती थी पाल वोटरों के साथ अन्य पिछड़ी जातियों के वोट उनसे जुड़ने की उम्मीद थी लेकिन वह उन वोटरों का विश्वास नहीं जीत सके। पिछली बार भी वह इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे, तब उन्हें अकबरपुर रनियां विधान सभा में 18059 वोट मिला था जबकि इस बार 18286 वोट मिला। इसी तरह से इटावा संसदीय सीट से पांच साल भाजपा से सांसद रहे अशोक दोहरे चुनाव के पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने उन्हें इटावा से ही टिकट दे दिया था लेकिन वह सांसद रहने के बाद भी जनता पर विश्वास नहीं बना सके। पिछली बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने पर उन्हें सिकंदरा विधानसभा सीट से 87180 वोट मिले थे। इस पर उन्हें केवल 4392 वोट मिले। जालौन-गरौठा सीट इस बार कांग्रेस प्रत्याशी ब्रजलाल खाबरी हैं। 2014 के चुनाव में वह बसपा से मैदान में तब उन्हें भोगनीपुर विधानसभा में 48019 वोट मिले थे लेकिन इस बार कांग्रेस से मैदान में उतरने पर यहां से केवल 8114 वोट मिले हैं।
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