इटावा। बिजली मरम्मतीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आपूर्ति व्यवस्था बेहतर नहीं हो सकी है। जिले में इस वर्ष साढ़े पांच माह में 1150 ट्रांसफॉर्मर फुंक चुके हैं। जबकि बीते वर्ष बिजनेस प्लान के तहत करीब 15 करोड़ रुपये से 86 नए ट्रांसफॉर्मर रखे गए है और 249 ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता में वृद्धि की गई है। शहर से लेकर ग्रामीणांचलों में ओवरलोड के चलते लगातार फुंक रहे ट्रांसफॉर्मरों से आपूर्ति व्यवस्था चरमरा रही है। हालांकि विभाग का दावा है कि बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार ट्रांसफार्मरों के फुंकने की संख्या में 10 फीसदी तक कमी आई है।
जिले में बिजली निगम के तीन खंड हैं। इसके तहत कुल 56 बिजली घरों से ढाई लाख उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। इसमें 63 हजार उपभोक्ता शहर, जबकि शेष उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्र के हैं। उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए जिले में कुल 16,443 ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसमें बीते वर्ष लगाए गए 86 नए ट्रांसफार्मर शामिल नहीं है। गर्मी के मौसम में लोगों को बिजली संकट से परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए शासन ने ओवरलोड ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि के आदेश दिए थे, ताकि किसी भी हाल में ट्रांसफार्मर न फुंकें और लोगों को बिजली संकट न झेलना पड़े। 2024-25 में बिजनेस प्लान के तहत लगभग 28 करोड़ रुपये भी जारी किए गए, अधिकारियों ने इस धनराशि में से 15 करोड़ की राशि से ट्रांसफार्मरों की खरीद, क्षमता वृद्धि और उनके रखरखाव के लिए खर्च कर दिए। लेकिन इसके बाद भी ट्रांसफार्मरों के फुंकने की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। वर्कशॉप के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से लेकर 15 सितंबर तक लगभग 1150 फुंके ट्रांसफार्मर आ चुके है। इनमें 25, 63, 100 और 250 केवी के ट्रांसफार्मर शामिल है। निगम का दावा है कि 250 केवीए या इससे अधिक क्षमता के ट्रांसफार्मर ज्यादा नहीं फुंक रहे हैं, जिन्हें या तो मौके पर ही ठीक किया जाता है, अन्यथा की स्थिति में कंपनी की ओर से बदल दिया जाता है।