लंबे समय तक उत्तर भारत के एकलौते थोक इलेक्ट्रिक बाजार के रूम में शुमार रहे मनीराम बगिया स्थित थोक इलेक्ट्रिक बाजार ने अपने 115 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
दो-तीन दुकानदारों के फुटकर काम से शुरू हुआ ये बाजार आज करीब 300 करोड़ रुपये मासिक टर्नओवर वाला बाजार बन चुका है। अब ये बाजार ‘मेन इन इंडिया’ को बढ़ावा दे रहा है। यहां के दुकानदारों ने चीन के उत्पादों को नकार दिया है। व्यापारियों ने बताया कि कानपुर कपड़ा बाजार और किराना बाजार को ही उनसे वरिष्ठ होने की उपलब्धि हासिल है।
मना रहे 75वीं वर्षगांठ
यहां के व्यापारियों के सुख दुख में काम आने वाले कानपुर इलेक्ट्रिक कॉन्ट्रैक्टर्स एंड मर्चेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन संगठन की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस उपलक्ष्य में एसोसिएशन लाजपत भवन, मोतीझील में 25, 26, 27 जनवरी को प्रदर्शनी लगाने जा रहा है।
वर्ष 1905 का कैशमेमो आज भी
बाजार की प्राचीनता बताने के लिए आज भी वर्ष 1905 का कैशमेमो उपलब्ध है। कानपुर इलेक्ट्रिक कॉन्ट्रैक्टर्स एंड मर्चेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन गोपाल तिवारी बताते हैं कि यहां सबसे पुराने व्यापारी कुंदन लाल थे। उनके पोते आज भी कुंदन एंड कंपनी नाम से व्यापार कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि इस बिल पर पड़ी तारीख से कम से कम पांच साल पहले यहां कारोबार शुरू हुआ था। इसी तरह वर्ष 1915 में यहां के जुगुल किशोर मल्होत्रा ने कानपुर इलेक्ट्रिक ट्रेडिंग के नाम से बिजली के उपकरण बेचने का काम शुरू किया था।
कानपुर में बिजली के उपकरणों की खपत देखकर ही 1910 में ब्रिटेन की जनरल इंजीनियरिंग कंपनी ने माल रोड पर ओवरसीज दफ्तर खोला था। कानपुर में खुला यह दफ्तर एशिया का नौवां दफ्तर था।