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कानपुर: महाना की बैठक से मंडलायुक्त, CP, DM समेत 10 अधिकारी नदारद, विस अध्यक्ष बोले- तमाशा करने नहीं आते हैं

Fri, 16 Oct 2026 10:12 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

महाना की बैठक से 10 अधिकारी नदारद रहे। विस अध्यक्ष गायब अफसरों पर भड़के और  बोले कि बैठक करने आते हैं, तमाशा नहीं। सीडीओ को निर्देश दिए कि सभी से लिखित में जवाब चाहिए अन्यथा कार्रवाई होगी। 
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विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर के समग्र विकास को लेकर शुक्रवार को नवीन सभागार में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की बैठक से मंडलायुक्त, पुलिस कमिश्नर, डीएम, एनएचएआई परियोजना निदेशक समेत 10 बड़े अधिकारी नदारद रहे। इस पर महाना का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि यहां बैठक करने आते हैं तमाशा नहीं। यह रवैया ठीक नहीं है। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव जे जैन को निर्देश दिया कि बिना सूचना गैरहाजिर अधिकारियों से लिखित में जवाब-तलब लेकर भेजें।
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महाना की अध्यक्षता में बैठक में सड़क, बिजली, पानी, सफाई और निर्माण कार्यों की बदहाली पर सवाल उठे। बैठक की शुरुआत रिंग रोड निर्माण की समीक्षा से होनी थी। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक पंकज यादव बिना सूचना नदारद रहे। उनके स्थान पर पहुंचे अधिशासी अभियंता ने निर्माण कार्यों का ब्योरा दिया। धोबीघाट से ट्रांसगंगा सिटी तक पुल निर्माण की समीक्षा में सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने भूमि अधिग्रहण की समस्या बताई। इस पर कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार ने आठ परिवारों के विस्थापन का मुद्दा उठाते हुए बताया कि इसके लिए नगर निगम और केडीए के अधिकारियों को करीब 50 बार फोन किया गया लेकिन कोई जांच करने तक नहीं पहुंचा। केडीए उपाध्यक्ष ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, एमएलसी सलिल विश्नोई, विधायक राहुल बच्चा, केडीए वीसी अंकुर कौशिक समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की बैठक - फोटो : अमर उजाला
दिवाली तक सड़कें ठीक नहीं हुईं तो देना होगा जवाब
शहर की बदहाल सड़कों और कूड़ा उठान की समस्या पर महाना ने सवाल किया कि जब लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो कूड़ा उठान की व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं हो पा रही है? इस पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बताया कि सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए निजी एजेंसियों की मदद ली जा रही है और प्रतिदिन करीब 1600 टन कूड़ा उठाया जा रहा है। साथ ही दिवाली तक 300 सड़कें बनवाने की बात कही। महाना ने री-टेंडर वाली सड़कों के काम शुरू होने की समय सीमा पूछी। साथ ही सवाल उठाया कि एक बार सर्वे और एस्टीमेट तैयार होने के बाद निर्माण लागत क्यों बढ़ जाती है? उन्होंने कहा कि यह केवल नगर निगम की समस्या नहीं बल्कि कई इंजीनियरिंग विभागों में यही स्थिति है। निर्देश दिए कि दिवाली तक सड़कें दुरुस्त हों और सभी खंभों पर लगीं स्ट्रीट लाइटें ठीक कराई जाएं। इसके बाद भी शिकायतें मिलीं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

 

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की बैठक - फोटो : अमर उजाला
मेट्रो ने सड़कें खोदीं, पत्र लिखने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
मेट्रो निर्माण से क्षतिग्रस्त सड़कों और पाइपलाइनों का मुद्दा भी बैठक में उठा। महापौर प्रमिला पांडेय ने स्वदेशी मिल के सामने की समस्या बताई। कहा कि जहां-जहां पाइपलाइन तोड़ी गई वहां सही तरीके से मरम्मत नहीं हुई। जलकल के प्रबंधक आनंद त्रिपाठी ने बताया कि सुधार के लिए कई बार पत्र लिखे गए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। महाना ने कहा कि सड़कें जैसी पहले थीं वैसी ही चाहिए। विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि शास्त्रीनगर मेट्रो स्टेशन पर डाली गई वैकल्पिक सीवर लाइन से लोगों की समस्या दूर नहीं होगी। उन्होंने स्थायी समाधान कराने की मांग की।

20 दिन तक नहीं बदले जा रहे ट्रांसफार्मर
महाना ने कहा कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की स्थिति इतनी खराब है कि 20 दिन तक फुंके ट्रांसफार्मर नहीं बदले जा रहे। दो किसानों ने ट्रांसफार्मर खराब होने की तस्वीरें भेजकर शिकायत की है। उन्होंने अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि दोनों किसानों के ट्रांसफार्मर दो दिन के भीतर बदले जाएं।
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पार्कों में ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने की सूची तक नहीं
पार्कों में लगे ट्रांसफार्मरों को हटाकर किनारे शिफ्ट करने के मामले में भी विभागों के बीच तालमेल की कमी सामने आई। केस्को एमडी नेहा जैन ने बताया कि नगर निगम ने ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने के लिए जरूरी सूची उपलब्ध नहीं कराई है। बताया कि शिफ्टिंग का खर्च संबंधित विभाग को देना होता है। इस पर नगर निगम से पूछा तो जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

मनमाना एस्टीमेट बनाने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई
निजी अस्पतालों की ओर से इलाज के नाम पर मनमाना एस्टीमेट बनाने का मामला भी उठा। महाना ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को निर्देश दिए कि इलाज के खर्च को लेकर मरीजों को परेशान करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हो और अनियमितता मिलने पर लाइसेंस निलंबित किए जाएं।

इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
- हैलट अस्पताल की सड़कों को दुरुस्त कराने और मेडिकल कॉलेज के भीतर खराब ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने की मांग उठी।
- स्पेशियलिटी ब्लॉक में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 33 केवी उपकेंद्र बनाने को छह करोड़ रुपये का भुगतान कराने की बात कही।
- हैलट के सामने अंडरपास निर्माण पर लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ने मंदिर के कारण आ रही बाधा की जानकारी दी। इसका जल्द समाधान निकालने को कहा।
- जाजमऊ में 32 वर्गगज के मकान में निर्माण कार्य रुकवाने के मामले में केडीए की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई गई।
- रूमा औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल स्थिति पर यूपीसीडा के अधिकारियों से जवाब मांगा गया।
- सरसौल स्थित सैबसी झील की व्यवस्था 10 साल बाद भी सुधार न होने पर नाराजगी जताई।
 
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