अशोह गांव के पास अवशेषए की जांच के लिए मिट्टी का परीक्षण करते पुरातत्व विभाग के श्रमिक।
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में एक के बाद एक नवपाषाण काल के यंत्र, उपकरण मिलने से मानव सभ्यता के सबूत और पुख्ता होते जा रहे हैं। यहां के पूर्वजों की कहावतों और कहानियों को ये सबूत सच्चाई में तब्दील करते हुए नजर आ रहे हें। इस भूमि पर हजारों साल पुरानी सभ्यता के कयास बहुत पहले से लगाए जा रहे थे लेकिन तथ्य आज सामने आ रहे हैं।
नव पाषाण काल के अवशेषों की पुष्टि से उत्साहित पुरातत्व विभाग की टीम ने आसपास के क्षेत्र में भी संभावनाआें के आधार पर सर्वे किया। टीम के सदस्यों ने दावा किया है कि कलवलिया से पहाड़ी मार्ग पर अशोह गांव के पास भी पाषाण काल के प्रमाण मिल सकते हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र की विभिन्न विशेषाताओं में अब यह भी शामिल हो गया है कि दस हजार साल पहले भी यहां मानव जाति मौजूद थी और कृषि पशुपालन जैसे काम होते थे।
आज जहां से यमुना व मंदाकिनी नदी बहती है उसके आस पास भी अन्य जलस्त्रोत रहें होंगे। मंगलवार को विशेषज्ञों की टीम ने यह स्पष्ट कर दिया था कि बुंदेलखंड में प्राचीन सभ्यता रही है और नव पाषाण काल में जल की उपलब्धता, कृषि यंत्र, औजार व अन्य अवशेषों से टीम के सदस्य उत्साहित हैं।