वन विभाग ने भी मानी थी पौधों के संरक्षण में लापरवाही
वर्ष 2019 से पहले वन विभाग की अनुश्रवण और मूल्यांकन इकाई ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि प्रदेश में पौधों के संरक्षण में लापरवाही के चलते तीन साल पहले लगाए गए पौधों में से अधिकतर खत्म हो गए थे। इसके चलते हरियाली क्षेत्र में 100 वर्ग किमी की कमी आई थी। हालांकि उसके बाद 2019 में आई रिपोर्ट में प्रदेश में 12 वर्ग किमी हरियाली बढ़ने की बात सामने आई है।
जो हरियाली है, वह वन विभाग की देन
हर साल पौधरोपण के लक्ष्य के करीब 30 फीसदी पौधे वन विभाग लगाता है। वन विभाग एक पौधे को लगाने और संरक्षण पर औसतन 11 रुपये खर्च करता है। यही वजह है कि जो हरियाली है, वह वन विभाग की देन है।
पौधों के न पनपने तीन बड़े कारण
अन्य विभागों के पास बजट नहीं तो कैसे करें देखभाल
वन विभाग हर साल लक्ष्य के 70 प्रतिशत पौधे अन्य विभागों से लगवाता है। इन विभागों के पास इस मद में कोई बजट नहीं होता। इस वजह से पौधे बगैर ट्री गार्ड के ही लगा दिए जाते हैं। साथ ही इन्हें पानी भी नहीं दिया जाता। इस वजह से ये पौधे या तो सूख जाते हैं या छुट्टा मवेशी चर जाते हैं।
मवेशियों का आज भी खुला घूमना
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने छुट्टा मवेशियों से छुटकारा दिलाने के लिए कई गोशालाएं बनवाई हैं। शहर में भी इस तहर की गोशालाएं और आश्रय स्थल हैं। लेकिन निकायों की लापरवाही की वजह से आज भी कई इलाकों में छुट्टा मवेशी घूमा करते हैं। ये मवेशी बगैर ट्री गार्ड के लगे पौधों को चट कर जाते हैं।
विकास की अंधी दौड़
विकास के नाम पर भी पेड़-पौधों की बलि दे दी जाती है। आवासीय या अन्य योजनाओं के आड़े आने वाले पेड़ों को काट तो दिया जाता है, लेकिन जितने काटे जाते हैं उतने पौधे लगाए नहीं जाते। जो लगाए भी जाते हैं, वे पनप नहीं पाते और अनदेखी के चलते सूख या उजड़ जाते हैं।
इस बार पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ के तहत पौधरोपण किया जाएगा। लोगों के साथ ही विभागों को भी जागरूक होना पड़ेगा कि पौधा लगाने के साथ ही उसे बचाया भी जाए। कई बार पानी न मिलने से सूख जाते हैं या मवेशी उनको अपना भोजन बना लेते हैं। लिहाजा इस बार पौधरोपण के पौधों के संरक्षण पर भी सभी को जोर देना होगा। -अनिल कुमार द्विवेदी, प्रभारी डीएफओ
कानपुर में पाई जाती हैं पेड़ पौधों की 42 प्रजातियां
अकेसिया, अमरूद, अरु, अर्जुन, अरिकुली फर्मिस, अशोक, आम, इमली, आंवला, कंजी, कैथा, कनक चंपा, कनेर, केसिआ श्यामिया, काला शीशम, खैर, गुटेल, गूलर, गोल्ड मोहर, चिलबिल, छितवन, जंगल जलेबी, जामुन, देशी बबूल, नींबू, नीम, प्रोसोपिस, पाकड़, पीपल, फलदार, बकैन, बेर,बरगद, बेल, बांस, मेडिसिनल प्लांटस, शरीफा, शहतूत, शीशम, सेमल, सहजन, सागौन।
छह साल में कितने लगाए गए पौधे
वर्ष क्षेत्रफल हेक्टेयर में पौधे
2018-19 411.40 1384352
2019-20 776.24 2848486
2020-21 1019.00 3610217
2021-22 1121.60 4423680
2022-23 661.46 3995340
2023-24 129.34 3105600
कुल 4119.04 19367675