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मारपीट में घायल कैदी ने दम तोड़ा

Sat, 29 Aug 2015 11:52 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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जिला कारागार में चार दिन पहले मारपीट में घायल हुए कैदी ने कानपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं गैंगरेप के मामले में बंद एक कैदी की कैंसर से मौत हो गई। अचानक हुई दो मौत से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। दोनों कैदियों का कड़ी सुरक्षा के बीच कानपुर और कन्नौज में पोस्टमार्टम कराया गया।
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मालूम हो कि 26 अगस्त को जिला जेल में इलाज करा रहे वृद्ध कैदी पातीराम (77) पुत्र मुरली निवासी भूड़पुरवा थाना ठठिया का कैदी शिवराज से विवाद हो गया था। मारपीट में शिवराज गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद जेल प्रशासन ने उसे राजकीय मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था।

बाद में उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान शनिवार सुबह पातीराम ने कानपुर हैलट अस्पताल में दम तोड़ दिया। जेलर गिरजा शंकर यादव ने बताया कि पातीराम 10 अक्तूबर 2013 को कन्नौज जेल आया था। वह हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। बीते दिनों वह बीमार हो गया था।
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जून माह से जेल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। इससे पहले भी कई बार उसे हैलट, मेडिकल कालेज तिर्वा उपचार के लिए भेजा जा चुका था। जेल अधीक्षक यूपी मिश्रा ने 26 अगस्त को किसी भी प्रकार की मारपीट जेल में होने से इनकार किया था। हकीकत में कैदी की बीमारी के कारण हालत बिगड़ी थी। उन्होंने बताया कि मृत कैदी के शवों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा।

वहीं जिला जेल में गैंगरेप व दलित उत्पीड़न के मामले में बंद कैदी तिर्वा निवासी सुधीर शर्मा (56) की शनिवार को मौत हो गई। जेल सूत्रों के मुताबिक सुबह करीब आठ बजे सुधीर चाय पी रहा था। अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। उसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेलर गिरजा शंकर यादव ने बताया कि सुधीर कैंसर से पीड़ित था। उसका कई महीने से इलाज चल रहा था। बीमारी के कारण उसकी मौत हुई है। उन्होंने बताया कि वह 16 जनवरी 2012 से जेल में बंद था। रेप के मामले में उसे उम्रकैद मिली थी।

नौ माह पहले हुई थी वर्चस्व की जंग
अनौगी जिला जेल में पहले भी कैदियों की मौत के मामले हुए हैं। विगत 17 जुलाई को बैरक वन डी का कैदी सुधीर यादव की कैदी मोंटी से मारपीट हुई थी। मारपीट में दोनों ही कैदी घायल हो गए थे। जेल अधीक्षक ने इस मामले में भी मारपीट होने से इनकार किया था। नौ माह पहले हुई मारपीट में एक कैदी की मौत हो गई थी। तब झांसी निवासी कैदी यूनुस का विवाद जेल में बंद कन्नौज के कैदी व उसके साथियों से हो गया था। इसी तरह गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के निवासी कैदियों के दो गुटों में बीते साल मारपीट हुई थी। तब आधा दर्जन कैदी घायल हुए थे। जेल के अंदर दो कैदियों की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। एक कैदी की मौत के बाद तो दो दिन तक जेल के अंदर जमकर हंगामा हुआ था।

स्टिंग आपरेशन में खुली थी पोल
वर्ष 2014 में जेल के अंदर नशीले पदार्थ बिकने का स्टिंग आपरेशन एक निजी चैनल ने किया था। तब शासन के दखल से यह मामला गरमाया था। बाद में अधीक्षक को बदल दिया गया था। इसके अलावा जेल के अंदर आधा दर्जन बार विभिन्न अव्यवस्थाओं को लेकर कैदी हंगामा भी कर चुके हैं। दो बार तो छतों पर चढ़कर कैदी बवाल कर चुके हैं। जेल सूत्रों की मानें तो जेल के अंदर ज्यादा से ज्यादा सुख सुविधाएं पाने के लिए कैदियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी रहती है।
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