कन्नौज। कभी रसोई और घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब डेयरी व्यवसाय के दम पर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी कई महिलाओं ने पशुपालन को घरेलू काम से बढ़ाकर एक सफल उद्यम में बदल दिया है। अब वह सिर्फ दूध उत्पादन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उसकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और सीधे ग्राहकों तक आपूर्ति कर अच्छी खासी आय अर्जित कर रही हैं।
पहले जहां पशुपालन केवल घर की दूध की जरूरत पूरी करने तक सीमित था, वहीं अब यह महिलाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक आय का जरिया बन गया है। समूह की महिलाएं ताजा दूध के साथ-साथ देसी घी, पनीर, मावा और छाछ जैसे मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पाद तैयार कर रही हैं। कई गांवों में तो महिलाएं सुबह-शाम खुद ही दूध कलेक्शन सेंटर चला रही हैं और शहर के उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी भी दे रही हैं। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और उन्हें दूध का उचित दाम मिल रहा है।
तिर्वा क्षेत्र की महिला किसान सुनीता देवी बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने दो भैंसों से शुरुआत की थी, आज उनके पास पांच दुधारू पशु हैं। हर महीने दूध बेचकर वह 25 से 30 हजार रुपये कमा लेती हैं। उपायुक्त स्वत: रोजगार राजकुमार लोधी ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ही हमारी प्राथमिकता है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हम उन्हें पशुपालन के लिए अनुदान, प्रशिक्षण और बैंक लिंकेज की सुविधा दे रहे हैं। डेयरी व्यवसाय कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला मॉडल है। महिलाएं आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।