मौसम की मार से आलू का साइज छोटा रह गया। शीतगृहों में आलू सुरक्षित करने के लिए आलू की ग्रेडिंग में किसानों को पसीना आ रहा है। छोटे साइज के आलूू देख किसान परेशान हैं। किसान राम निवास सविता का कहना है कि इस साल कोहरे व पाले की मार से आलू में शुरू में झुलसा रोग हो गया था। आलू का उत्पादन गिर गया है। आलू का फल छोटा निकल रहा है। प्रति एकड़ में 200- 220 पैकेट निकलने वाला आलू इस बार प्रति एकड़ 150 पैकेट निकल रहा है। जिससे सभी किसान परेशान हैं।
किसान महेश चंद्र कहते हैं कि आलू का उत्पादन तो गिरा है लेकिन वह अच्छे दामों में बिक भी नहीं रहा है। कच्ची फसल मंदी रही है। वहीं, पक्की फसल भी खोदाई के समय खराब होने के कारण अच्छे दामों में नहीं बिक रही है। मजबूरी में कोल्ड स्टोरेज ले जाना पड़ रहा है। वहीं, तेज धूप के कारण सफेद आलू खेतों में सड़ने लगा है।
किसान पंकज, ओमकार, कल्लू, छुन्नूलाल, राम विलास, मन्ना आदि किसानों ने बताया कि आलू का साइज छोटा निकलने से कम उत्पादन हो रहा है। इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण आलू में रोग लगते रहे हैं। आलू किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
कोट
मौसम में बदलाव के कारण शुरू में ही झुलसा लगने से आलू का उत्पादन गिरा है। जिन किसानों ने उनकी सलाह से दवा का प्रयोग सही किया होगा, वहां उत्पादन अच्छा होगा। अब शीत गृह में आलू भंडारण से पूर्व उसे खेतों से खोदकर छाया में रखे। सूर्य की तेज रोशनी से बचाएं। कम से कम पांच दिन तक हवा में डाले रखे। जिससे आलू में तापमान की सहनशीलता बढ़ जाए। इसके बाद ग्रेडिंग कर पैकेट में भरें और शीतगृहों में रखें। - डा. अमर सिंह (कृषि वैज्ञानिक कन्नौज)