तकरीर करते हजरत मौलाना आफाक अहमद।
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हिंदुस्तान के अजीम बुजुर्ग कुतबुल आक्ताब हजरत ख्वाजा हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह के तीन दिवसीय सालाना उर्स का ईद मीलादुन्नबी के प्रोग्राम से आगाज हो गया। मंगलवार देर रात आयोजित कार्यक्रम में आलिमों ने बाबा हाजी शरीफ के बताए गए रास्ते पर चलने की हिदायत दी। साथ ही दुनिया में अमन-चैन कायम रखनेेे के लिए इंसानियत व अमन का जो रास्ता वलियों ने दिखाया उस पर अमल करने पर जोर दिया।
हजरत आफाक अहमद मुजद्दिदी ने तकरीर करते हुए बताया कि तारीख गवाह है कि कयामत के बाद जब अल्लाह तआला ने दुनिया को फिर से आबाद किया तो हजरत नूह अलैह सलाम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। उनके दूसरे बेटे ने यहां पहुंचकर कन्नौज को बसाया। यहां की मिट्टी में वो खासियत रही कि हजरत ख्वाजा हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह यहां तशरीफ लाए और अपनी रूहानी शख्सियत से लोगों को नेक रास्ते पर चलना सिखाया।
मौलाना अखलाक ने कहा कि वलियों ने बयाबान को भी अपनी सीरत से गुलशन कर दिया। हजरत हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह 70 साल तक बयाबान में इबादते इलाही में मशगूल रहे। इसके चलते उनकी शख्सियत इतनी आला दर्जे पर पहुंच गयी कि जो कोई उनका जूठा खा लेता वही दीवाना हो जाता और ऊंचा मर्तबा हासिल कर लेता। इसके अलावा मौलाना कारी जियाउल कमर, आसिफ रजा, मौलाना शाहिद ने तकरीर के जरिए हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह की सीरत बयान की और उनके बताए रास्ते पर चलने को कहा। मौलाना कैस बनारसी, मौलाना बिलाल ने हाजी शरीफ की शान में मन्कबत पेश की। इस पर मौजूद भीड़ ने खूब वाहवाही की।
इस मौके पर उर्स कमेटी के सदर हाजी शमसुल खान, उबैदुल हसन खलीफा, मास्टर वसीउद्दीन, नावेद खान, कमेटी के ओहदेदारान-मेंबरान हजरात सहित हजारों लोग मौजूद रहे।