जिस एक्सप्रेस-वे को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव के दौरान जनता के सामने आईकॉन की तरह पेश किया। अब वही आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता हुआ नजर आ रहा है। सर्किल रेट की सामान्य दर से अधिक मूल्य पर किए गए 130 बैनामे यूपीडा ने अवैध माने हैं। उपनिबंधक कार्यालय में इन बैनामों की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के लिए एडीएम के निर्देश पर चार कानूनगो और 20 लेखपालों को लगाया गया है।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने एक्सप्रेस-वे के लिए सर्किल रेट की सामान्य दर से अधिक मूल्य पर किए गए 130 बैनामों को अवैध मानते हुए जिला प्रशासन से इन बैनामों को निरस्त करने की सिफारिश की है। सोमवार को अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार वैश्य के निर्देश पर तहसीलदार व नायब तहसीलदार ने उपनिबंधक कार्यालय में बैनामों की जांच शुरू कर दी।
नायब तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि सबसे पहले इस बिंदु पर जांच की जा रही है कि भूमि अधिग्रहण से पहले किन लोगों ने जमीन की नबियत (लैंडयूज) बदलवाकर बैनामा किया। ऐसे मामले सामने आने पर सबसे पहले क्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा राजस्व निरीक्षकों के माध्यम से सर्किल रेट का पुनरीक्षण भी करवाया जा रहा है।
इन गांवों की गई एक्सप्रेस-वे में जमीन
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे में छिबरामऊ तहसील क्षेत्र के लगभग चार हजार किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। इसमें सकरहनी, अमोलर, मुंडाला, बिरौली, नरमऊ, तेरारब्बू, तालग्राम देहात, बेहटा खास, रनवां, अयूबपुर, त्योर, भीकमपुर सानी, जलालपुर दीनदारपुर, बहादुरपुर मझिगवां, गोरखपुर हरिभानपुर, सौरिख देहात, हुसेपुर, सलेमपुर रैपालपुर, रसूलपुर, देवपुर, सिकंदरपुर जोगी डेरा, बझेड़ी, नगला खेमकरन, मिश्राबाद, डड़ौनी, नगला बिशुना, शरीफाबाद, सुल्तानपुर व शंकरपुर गांव शामिल हैं।
वर्जन
यूपीडा के पत्र के आधार पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लिए हुए बैनामों की बिंदुवार जांच की जा रही है। साथ ही सर्किल रेट का भी पुनरीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में एक्सप्रेस वे से जुड़े गांवों के लेखपालों और कानूनगो को लगाया गया है। मंगलवार को रिपोर्ट तैयार कर अपर जिलाधिकारी के पास भेज दी जाएगी। - धीरज कुमार श्रीवास्तव-तहसीलदार छिबरामऊ।