कन्नौज। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए शासन ने इस बार नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। अब योजना का लाभ लेने वाले सभी वर-वधू का ई-केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। जिला समाज कल्याण विभाग ने शादियों में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने और पात्र लोगों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए यह सख्त कदम उठाया है। शासन ने विभाग को इस बार 648 जोड़ों का मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह संपन्न कराने का लक्ष्य दिया है।
वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी हैं। अब बस शादियों के शुभ मुहूर्त की तिथियां आने का इंतजार है। जैसे ही शुभ मुहूर्त की तारीखें फाइनल होंगी, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से भव्य सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन शुरू कर दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1421 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था। इस बार 648 जोड़ों का लक्ष्य दिया गया है। अब आवेदन करने वाले वर और वधू दोनों की ई-केवाइसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके जरिए उनके आधार कार्ड और पहचान का डिजिटल वेरिफिकेशन होगा।
आवेदन फार्म में जो मोबाइल नंबर भरा जाएगा, उसका ओटीपी के जरिए सत्यापन किया जाएगा। इससे गलत या फर्जी मोबाइल नंबरों के जरिए होने वाले फर्जी आवेदनों पर पूरी तरह रोक लगेगी। योजना के तहत प्रति जोड़े पर सरकार द्वारा सहायता राशि दी जाती है। पीएफएमएस के माध्यम से लाभार्थी कन्या के बैंक खाते में भेजी जाएगी। विवाह संपन्न होने के बाद विवाह स्थल पर वर-बधू की फोटो अपलोड की जाएगी। जिला समाज कल्याण अधिकारी वेद प्रकाश मिश्र ने बताया कि लक्ष्य आ गया है। डिजिटल फेरबदल से प्रक्रिया थोड़ी सख्त है, लेकिन इससे केवल वास्तविक जरूरतमंद और गरीब परिवारों की बेटियों को ही मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ मिल सकेगा।
पात्रता और बैंक खाते की भी होगी जांच
नियमों में बदलाव के तहत केवल ई-केवाईसी ही नहीं, बल्कि आवेदकों के बैंक खातों की भी गहनता से जांच की जाएगी। लड़की के बैंक खाते का आधार सीडेड और डीबीटी इनेबल्ड होना जरूरी है, ताकि सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि सीधे उसके खाते में बिना किसी बाधा के पहुंच सके। इसके अलावा, वर-वधू की आयु सीमा (दुल्हन 18 वर्ष और दूल्हा 21 वर्ष) और परिवार की सालाना आय की भी कड़ी स्क्रूटनी की जाएगी।