छिबरामऊ। नर्सिंग छात्रा रिंकी को स्कार्पियो से कुचलने वाला हत्यारोपी अरुण राजपूत को पुलिस ने गुरुवार को कैरदा रोड से गिरफ्तार किया है। उसके पास से तमंचा भी बरामद हुआ है। हिरासत में मौजूद हत्यारोपी ने स्वीकार किया कि वह रिंकी को मारना नहीं चाहता था, केवल स्कार्पियो से हल्की चोट पहुंचाकर डराना चाहता था।
मैनपुरी जनपद के भोगांव थाना अंतर्गत ग्राम नगला मुकुंद (कुढ़रा) निवासी अरुण राजपूत उर्फ बृजेश ने बताया कि पिता चरन सिंह की मौत कई साल पहले हो गई थी। इसके बाद मां ने दूसरी शादी रचा ली और उसे ननिहाल छोड़ दिया। उसके छोटे भाई नितिन को साथ ले गई। ननिहाल में रहकर ही उसने बीएससी तक की पढ़ाई की। उसके साथी उसे मां की दूसरी शादी करने के लिए अक्सर ताने देते थे, जिससे वह आहत था। ननिहाल में रहते हुए उसकी दोस्ती पड़ोस की रिंकी उर्फ कुसुमलता से हो गई थी। वह रिंकी से शादी करना चाहता था।
रिंकी फर्रुखाबाद के बघार स्थित एक मेडिकल कालेज से नर्सिंग का कोर्स कर रही थी। कुछ महीनों पहले से रिंकी किसी से बात करने लगी थी। इससे नाराज होकर अरुण ने रिंकी की पिटाई भी कर दी थी। तब से रिंकी ने बात करना बंद कर दिया। 12 नवंबर को मेडिकल कालेज जाते समय स्कार्पियो से कुचल दिया था।
कैरदा रोड से पुलिस ने हत्यारोपी को दबोचा
सीओ ओमकार नाथ शर्मा ने बताया कि हत्यारोपी अरुण की गिरफ्तारी के लिए एसओजी, कोतवाल अजय अवस्थी, सौरिख थाना प्रभारी जेपी शर्मा व सर्विलांस टीम लगी हुई थी। पुलिस का दबाव बढ़ने पर उसने न्यायालय में सरेंडर करने की तैयारी कर ली थी। गुरुवार सुबह 7.20 बजे वह वकील से मिलने के लिए तहसील आ रहा था। इसकी भनक लगते ही कोतवाल अजय अवस्थी, एसओजी प्रभारी कमल भाटी, सर्विलांस प्रभारी ने कैरदा रोड पर घेराबंदी कर हत्या में प्रयुक्त स्कार्पियो समेत दबोच लिया। तलाशी में उसके पास से एक तमंचा व तीन कारतूस भी बरामद हुए। पूछताछ के बाद पुलिस ने अरुण को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भिजवा दिया।
आरोपी को सजा के बाद ही मिलेगा बेटी को न्याय
हत्यारोपी अरुण के पकड़े जाने की जानकारी होते ही रिंकी के पिता रामनरेश, मां लक्ष्मी, भाई राजीव व रोहित परिजनों के साथ कोतवाली पहुंच गए। परिजनों ने सीओ से मिलकर आरोपी को सजा दिलाए जाने के लिए गुहार लगाई। मां लक्ष्मी का कहना था कि अरुण को जब तक सजा नहीं मिलेगी, उसकी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा।
कॉल डिटेल से रिंकी पर नजर रखता था अरुण
शातिर दिमाग अरुण मोबाइल एप के माध्यम से रिंकी के मोबाइल की पूरी कॉल डिटेल निकाल लेता था। इसी की मदद से वह रिंकी पर पूरी नजर रखता था। कई बार उसने रिंकी को दूसरों से बात न करने से मना करते हुए धमकाया, लेकिन जब वह नहीं मानी तो उसके साथ मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी तक दे डाली थी।
कोरोना कॉल के बाद शुरू किया था शराब तस्करी का कारोबार
ननिहाल में रह रहे अरुण जेब खर्चे के लिए पूरी तरह से मामा शिवनाथ व रामऔतार पर निर्भर था। कोरोना कॉल के बाद आर्थिक स्थित पूरी तरह से बिगड़ गई और वह शराब तस्करी के कारोबार में उतर आया। हत्यारोपी अरुण उर्फ बृजेश की माने तो दिल्ली से बिहार तक शराब तस्करी का जाल बिछा रहा था, इसके सहयोग के लिए कई युवक उसके साथ काम करते हैं। इस कारोबार को अंजाम देने के लिए वह तेज रफ्तार वाली पुरानी गाड़ियां खरीदकर प्रयोग करता था।
इलाके के शराब माफिया से मिले सुरागों से आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस की चार टीमें उसकी गिरफ्तार नहीं कर पाईं। तब पुलिस ने अरुण के शराब तस्करी में सहयोग करने वाले इलाके के एक शराब ठेकेदार को हिरासत में लिया था। गांव के लोगों का आरोप था कि अरुण के द्वारा हरियाणा से लाई गई सस्ती शराब को यह ठेकेदार आसपास के इलाके में बिक्री कराता था। इस शराब ठेकेदार से पूछताछ में पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे थे, उसके बाद नगर से करीब 90 किलोमीटर दूर हत्यारोपी को उसके एक ठिकाने से पकड़ने में पुलिस सफल हुई। पुलिस ने शराब ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं की।