केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के फरमान के बाद
नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) के इंजीनियर जीटी रोड को चौड़ा
करके सिक्सलेन बनाने के लिए कागजी कवायद में लग गए हैं। इसके तहत कन्नौज
जनपद में तीन रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाएंगे, ताकि एनएच-91 पर चलने वाले वाहन
चालक बाधा रहित सफर तय कर सकें।
कानपुर से अलीगढ़ तक के बीच करीब 72
किलोमीटर का हिस्सा कन्नौज जनपद की सीमा में आता है। इसमें 34 किलोमीटर के
हिस्से में जीटी रोड किनारे कानपुर से फर्रुखाबाद होते हुए कासगंज तक जाने
वाली रेलवे लाइन निकली है। इस बाबत एनएचएआई के अधिशासी अभियंता पीपी सिंह
बताते हैं कि जीटी रोड को फोरलेन बनाने के लिए सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका
है।
बताया कि बीते दिनों दिल्ली में हुई विभागीय बैठक में फोरलेन संबंधी
डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) जमा कर दी गई है। उन्होंने बताया कि कुछ
दिनों पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिल्ली में मुलाकात
के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से अलीगढ़ से कानपुर तक जीटी रोड को
सिक्सलेन बनाने की मांग की थी, जिसे मौखिक तौर पर स्वीकृति दे दी गई है।
अब मंत्रालय से लिखित आदेश जारी होने का इंतजार हो रहा है।
उन्होंने
बताया कि फोरलेन डीपीआर सर्वे के दौरान सारी कागजी औपचारिकताएं और जरूरी
जानकारियां जुटा ली गई हैं। सिक्सलेन की डीपीआर बनाने में कोई ज्यादा वक्त
नहीं लगेगा। बताया कि बड़े अफसरों का आदेश मिलते ही सिक्सलेन निर्माण की
डीपीआर कुछ महीनों में ही तैयार करके पेश कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि
कन्नौज, गुरसहायगंज और छिबरामऊ में नवनिर्मित बाईपास को प्रोजेक्ट में
शामिल किया गया है। बताया कि कन्नौज, गुरसहायगंज या छिबरामऊ शहर के अंदर
आबादी के हिस्से के स्थान पर बाईपास को चौड़ा किया जाएगा। कन्नौज शहर में
नवनिर्मित 10 किलोमीटर लंबे बाईपास को एनएचएआई ने हाल ही में प्रदेश सरकार
से अपने अधिकार क्षेत्र में भी ले लिया है।
बताया कि बाईपास के पूर्वी
और पश्चिमी छोर पर मौजूदा आरओबी के समानांतर दो नए आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज)
का निर्माण भी होगा। वहीं गुरसहायगंज में बाईपास की लंबाई बढ़ाने के साथ ही
नए आरओबी का भी निर्माण प्रस्तावित है। फिलहाल फोरलेन डीपीआर में 1.5 मीटर
या 1.8 मीटर का डिवाइडर प्रस्तावित किया गया है, जो सिक्सलेन की स्थिति
में बढ़ भी सकता है।
बताया कि छोटे-छोटे कस्बों की आबादी क्षेत्र में जल
निकासी के लिए नाली और फुटपाथ भी बनेगा। उधर, जिस हिस्से में रेलवे लाइन
निकली है, वहां पर उत्तरी छोर पर ही जमीन ज्यादा ली जाएगी। ऐसी स्थिति में
आवश्यकता पड़ने पर कई जगहों पर किसानों की जमीन भी लोकनिर्माण विभाग को
अधिग्रहीत करना पड़ेगा।